एनआरएचएम के बजट से कर्मचारियों को दिया गया वेतन

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एनआरएचएम की राशि के दुरुपयोग पर नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने सवाल किया है कि एनआरएचएम की राशि से जो बीमारों के इलाज और दवा के लिये थी उससे परिवार कल्याण विभाग के कर्मचारियो को वेतन क्यों दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि एनआरएचएम की धनाराशि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए थी।
सरकार ने किस आधार पर उसे दरकिनार कर राशि का उपयोग अन्य कार्यो के लिए क्यों किया। न्यायमूर्ति प्रदीपकांत व न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी की पीठ ने दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये राज्य सरकार व केन्द्र सरकार के वकीलों से सवाल पूछें। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि केन्द्र सरकार द्वारा भेजे गये एनआरएचएम फण्ड का उपयोग अन्य कामों में किया जाना क्या पैसे के दुरुपयोग की श्रेणी में नहीं आता है।
केन्द्र सरकार की ओर अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक निगम ने पीठ को बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा कराये गये अंकेक्षण में फण्ड के दुरुपयोग व अनियमितता की बात सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर ने पीठ को बताया कि सीबीआई जांच के पहले कैग की जांच आवश्यक है। याची की ओर से अधिवक्ता अखिलेश कालरा व गौरव मेहरोत्रा ने पीठ को बताया कि एनआरएचएम फण्ड को लेकर प्रदेश में दो सीएमओ तथा एक डिप्टी सीएमओ की हत्या हुई। इस घोटाले में उच्च पदों पर बैठे लोग शामिल है तथा लखनऊ एनआरएचएम की जांच सीबीआई कर रही है इसलिए पूरे राज्य की जांच भी सीबीआई से कराई जाये।












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