50 हजार लोन के लिए 1 लाख गवां बैठे मुस्द्दीलाल

सड़क के किनारे चाय की दुकान चलाने वाले 50 साल के इंदर पाल ने पंचायत भवन में आयोजित होने वाली कष्ट निवारण समिति की बैठक में अपना कष्ट समिति के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह के समक्ष रखा। उसने बताया कि किस प्रकार बैंक से 50 हजार लोन लेने के चक्कर में उसके एक लाख 17 हजार रूपये खर्च हो गए। एक साल तक बैंक के चक्कर काटने के बाद बैंक ने उसे 50 हजार की बजाय 25 हजार का लोन दिया।
वन इंडिया से बातचीत में चाय विक्रेता इंदर पाल ने बताया कि अपनी दुकान को पक्का बनाने के लिए उसने स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत 10 अगस्त 2010 को कॉपरेटिव बैंक की मुख्य शाखा में 50 हजार रूपये के लोन के लिए अप्लाई किया था। जिसे कागजी कार्यवाही के लिए बैंक ने अपने स्थानीय सहायक शाखा को भेज दिया।
उसके बाद शुरू हुआ बाबुओं के टेबल पर चक्कर काटने का दौर, कभी कागज पूरा न होने तो कभी अन्य कारण बता-बताकर बैंक के बाबुओं ने उसे एक साल तक घुमाए रखा। इस दौरान उसकी मेहनत की कमाई के एक लाख 17 हजार रूपये दौड़-धूप करने और कागजों को एकत्रित करने में लग गए। इसके बाद भी वह साहस करके बैंक गया।
बैंक ने उसका लोन तो सेंशन कर दिया, मगर उसे मिले तो बस उसे 25 हजार रूपये । अपने आप को ठगा सा महसूस करने वाले इंदर पाल इस मामले को लेकर जिला कष्ट निवारण समिति के पास पहुंचे जहां उन्हें सरकार की ओर कार्यवाही का आश्वासन तो मिल गया लेकिन डूबे हुए पैसे नहीं मिले। उधर, बैंक प्रबंधन यह कह रहा है कि उसने तो अपनी ओर से लोन दे दिया है।












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