भ्रष्टाचार की आग में जली दिल्ली विधानसभा

आपको बता दें कि गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की और सदन पर दबाव बनाने के लिए वे विधानसभा अध्यक्ष के आसन तक पहुंच गए। पर विस अध्यक्ष उनके बात से सहमत नहीं हुए और भाजपा के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही आधे घंटे तक स्थगित कर दी। पर सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तब भी भाजपा विधायकों ने एक बार पुनः मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को घेरने की कोशिश की और राष्ट्रमंडल घोटाले के आरोप पर बयान देने की इजाजत देने जबकि उन्हें बालने की इजाजत नहीं देने के विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री के फैसले पर सवाल उठाए। विपक्षी विधायकों ने सरकार और मुख्यमंत्री के विरोध में नारे लगाए। शीला ने मलहोत्रा पर भी राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुई अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप लगाए।
इस आरोप के जवाब में मलहोत्रा ने कहा कि मैं किसी भी निर्णय में शामिल नहीं था, जबकि मुख्यमंत्री मंत्रियों के उस समूह में शामिल थीं जो इन परियोजनाओं का निरीक्षण कर रहा था। हंगामे के दौरान ही शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने सभी विपक्षी विधायकों को सदन से बाहर करने का प्रस्ताव रखा और विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिलने के बाद मार्शलों ने उन्हें बाहर कर दिया। अब भाजपा एक बार पुनः अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई है औऱ आशा है कि जब तीन दिन के बाद इनकी वापसी होगी उस समय विधानसभा के और हंगामेदार होने की संभावना है।












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