छेड़खानी के आरोपी बीएसएफ कर्मचारी की सजा पर अंतिम मुहर

न्यायमूर्ति प्रदीन नंदराज योग व न्यायमूर्ति सुनील गौड की खंडपीठ ने बर्घीस को सेना अदालत द्वारा प्रदान सजा संबंधी फैसले को उचित ठहराया है। खंडपीठ ने कहा कानून में स्पष्ट है कि इस प्रकार अप्रत्याशित घटना के मामले में आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने कहा बीएसएफ के कैंपो में काफी महत्वपूर्ण हो जाता कि सभी मर्यादा में रहे जहां बल के कर्मियो की पत्नियां भी रह रही है। सेना अदालत ने साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर ही उसे तीन माह का कठोर कारावास औैर 10 वर्ष की पेंशन और सेवा को न देने का निर्णय किया था।
अदालत ने कहा तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी सहायक उपनिरीक्षक की अनुपस्थिति में हीटर ठीक करने के बहाने शिकायतकर्ता के क्वाटर में गया था। इतना ही नहीं उसने पहले उसके पड़ोसियों के बारे में जानकारी मांगी और उनके न होने पर छोटे बच्चे के घर में होने से वह विचलित हुआ। इसके बाद उसने बच्चें को अपना मोबाइल दिया व उस पर संगीत बजाकर महिला की प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया। खंडपीठ ने कहा इसके बाद हीटर ठीक करते हुए उसने हाथ फिसलने की आड़ लेकर महिला का हाथ पकड़ा और महिला के साथ छेड़छाड़ की। महिला ने विरोध जताया तो वह वापस चला गया। अत: ऐसी स्थिति में आरोपी का आरोप स्पष्ट रूप से साबित होता है।












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