भ्रष्टाचार को धर्म से जोड़कर बुखारी ने करवायी अपनी फजीहत

सीधी बात करें तो बुखारी साहब ने अन्ना हजारे के आंदोलन में मुस्लिमों से शामिल नहीं होने की बात कहकर खुद की फजीहत करवा ली है। इसका जवाब किसी और ने नहीं बल्कि खुद मुस्लिम समाज ने दिया है। बात अगर अन्ना हजारे के आंदोलन की शुरुआत से करें तो उसके ठीक एक दिन पहले पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। उस दिन देश भर के स्कूलों में भ्रष्टाचार विरोधी लहर देखने को मिली। छोटे-छोटे बच्चों ने स्वतंत्रता दिवस के दिन भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने का संदेश दिया। ये बच्चे किसी धर्म या जाति के प्रतिनिधि के रूप में नहीं बल्कि एक भारतीय होने के नाते बोल रहे थे।
जब आंदोलन शुरू हो गया और अपने चरम पर पहुंच गया तो हजारों, लाखों लोग दिल्ली समेत देश के हर शहर की सड़कों पर उतर आये। ये वो लोग हैं, जिन्हें कभी ना कभी भ्रष्ट तंत्र का सामना करना पड़ा। ये वो लोग हैं जिन्हें अपना एडमीशन कराने के लिए घूस देनी पड़ी, ये वो लोग हैं जिन्हें अस्पताल में सही इलाज, सरकारी दफ्तरों में काम-काज कराने के लिए किसी न किसी रूप में रिश्वत देनी पड़ी। इनमें वो लोग भी हैं, जिन्हें अपने धार्मिक आयोजन तक के लिए रिश्वत देनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि क्या देश के मुसलमान घूसखोरी का शिकार नहीं हुए।
बुखारी की यह बात कि वंदमातरम और भारत माता की जय इस्लाम के खिलाफ है, इसलिए मुसलमानों को वहां नहीं जाना चाहिए। खुद मुसलमानों को रास नहीं आयी। यही कारण है कि बुखारी को जवाब देने के लिए जनता दल (यूनाइटेड) के राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी के नेतृत्व में मंगलवार को ढाई हजार मुसलमान नॉर्थ एवेन्यू से मार्च निकालते हुए रामलीला मैदान पहुंच गये। खास बात यह है कि ये सभी मुस्लिम रामलीला मैदान पर अपना रोजा इफ्तार करेंगे।
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