एक अनजान फोन से हुआ साबिर की हत्या का खुलासा

पुलिस के मुताबिक फसाहत और आसिफ किठौर के हैं जबकि मुशाहिद पिलखुवा का। फसाहत और साबिर दोस्त थे। फसाहत और आसिफ दिल्ली जामिया कॉलेज में साथ-साथ पढ़ते थे, एक ही कमरे में रहते थे। आसिफ की बहन से फसाहत की दोस्ती थी। फसाहत ने ही साबिर की दोस्ती आसिफ से कराई थी। साबिर की भी आसिफ की बहन से दोस्ती हो गई। वह मेरठ केएक कॉलेज से बीए कर रही थी। साबिर ने उसे बीमा कंपनी में एडवाइजर बनवा दिया। यह फसाहत को नागवार गुजरा।
उधर, आसिफ ने साबिर को बहन के साथ घूमते देख लिया। लिहाजा, दोनों ने साबिर को मारने की योजना बनाई, जिसमें आसिफ ने ममेरे भाई मुशाहिद को भी शामिल कर लिया। आसिफ की शादी मुशाहिद की बहन से तय है। वारदात केदिन मुशाहिद का बीमा करने के बहाने फोन कर उसे मेरठ बुलाया। शाम में रोजा इफ्तार कर चारों वहां से मोटरसाइकिलों पर चले। चितौड़ा पुल के पास आसिफ ने बाइक रुकवाई और आसिफ की गोली मारकर हत्या कर दी।
ये था मामला: मैट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के सेल्स मैनेजर साबिर अली (30) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 14 अगस्त को उसका शव चितौड़ा के पास गंगनहर के नजदीक झाड़ियों में पड़ा मिला था। उसके दो गोलियां लगी थी। वह बिजनौर जिले के गांव पूट्ठा शेरपुर कल्याण का रहने वाला था। उसकी बाइक जिंदल चौराहे पर खड़ी मिली थी। उसके भाई राशिद ने मसूरी थाने में फसाहत, आसिफ और मुशाहिद को नामजद किया था। आरोप था कि पैसों के लेनदेन में तीनों ने उसकी हत्या की है।
फसाहत दिल्ली जामिया से कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग कर रहा है, फाइनल ईयर में है। मेरठ से मसूरी की तरफ चलने से पहले फसाहत ने अपना मोबाइल एटा जा रहे अपने दोस्त भगत सिंह को दे दिया था, जिससे उसकी लोकेशन घटना के समय एटा आए। जबकि कत्ल के बाद साबिर का मोबाइल पिलखुवा की तरफ जा रहे ऑटो में डाल दिया। पुलिस उनकी लोकेशन में उलझी रही। कत्ल की गुत्थी सुलझाने में एक अनजान फोन कॉल ने भी अहम भूमिका निभाई।
पुलिस के मुताबिक एक फोन कॉल आई थी, जिसमें उन्हें साबिर के हत्यारोपियों के नाम और साबिर की लाश कहां पड़ी है, यह बताया था। इसके अलावा वारदात वाले दिन शाम में साबिर के छोटे भाई राशिद ने साबिर से बात की थी। तब उसने कहा था कि वह जिंदल चौराहे पर फसाहत के साथ है। इससे फसाहत संदेह में आया।












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