खजाने को दुश्‍मनों से नहीं बल्कि पहरेदारों से है खतरा: अन्‍ना

Anna Hazare's fast enters sixth day, Anna thanked people
दिल्‍ली। अपने आंदोलन से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक के साथ कारगर व सख्त भूमि अधिग्रहण विधेयक लाने पर भी जोर दिया। प्रस्तावित विधेयक में ग्राम सभा की भूमिका अहम होनी चाहिए, जिसकी मंजूरी के बगैर भूमि अधिग्रहण संभव नहीं हो सकता है, जबकि मौजूदा अधिग्रहण नीति से सरकार किसानों को भूमिहीन बनाने पर तुली है। अपने 100 घंटे के अनशन के बाद अन्ना हजारे ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से आए किसानों से इस आंदोलन में अहम भूमिका निभाने तथा लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा।

उनकी इस अपील पर भारी संख्या में रामलीला मैदान में आए किसानों ने हाथ उठाकर इसआंदोलन को समर्थन देने का वचन दिया। भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए अन्ना ने कहा कि सरकारी खजाने को चोरों से नहीं पहरेदारों से खतरा है। देश को शत्रुओं ने नहीं बल्कि विश्वासघातियों ने धोखा दिया है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिल रहे चौतरफा समर्थन से उत्साहित अन्ना ने कहा कि लोकपाल विधेयक पारित होने से ही लड़ाई खत्म नहीं हो जाएगी। उनकी लड़ाई चुनाव सुधार और किसानों के हितों के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ जारी रहेगी।

जमीन पर जबरन कब्जा किया जाता है और विरोध करने वाले किसानों पर गोली दागी जाती है। मौजूदा औद्योगिक नीति पर अन्ना टीम की प्रमुख सदस्य मेधा पाटकर ने कहा कि आपात उपबंधों के आधार पर जमीनों का अधिग्रहण कर उद्योग लगाए जाते हैं, जहां मजदूरों का शोषण हो रहा है। दशकों से मजदूर पिस रहा है और सरकार चुप है।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे बदलने की जरूरत है। भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों को भूमिहीन बनाने की साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा। कुछ खास मामलों का जिक्र करते हुए पाटकर ने कहा कि उन्होंने जमींदारों (किसानों) को भूमिहीन होकर रेलगाडि़यों में मूंगफली बेचते देखा है।

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