लाल किले के हमलावर पाकिस्तानी आतंकी की फांसी की सज़ा कायम
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वीएस सिरपुकार और टीएस ठाकुर की बेंच ने मंगलवार को अश्फाक की याचिका खारिज कर दी। अश्फाक ने 13 सितंबर 2007 को दिये गये हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने अश्फाक के अलावा बाकी के छह आरोपियों को कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अश्फाक को सुनाई गई फांसी की सजा के खिलाफ अपील को यह कहकर खारिज कर दिया था, कि अश्फाक ने देश के खिलफ युद्ध छेड़ने का काम किया था। उस हमले में सेना के दो जवान समेत तीन लोग मारे गये थे।
इस मामले में अश्फाक की पत्नी रेहामना यूसुफ फारूकी को सात साल की सजा, श्रीनगर के नजीर अहमद कासिद और फारुक अहमद कासिद को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। इस घटना की बात करें तो 22 दिसंबर 2000 को अश्फाक ने लाल किले में घुस कर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें राजपूताना राईफल्स के दो जवान और एक सिविलियन मारा गया था। इस वारदात को अंजाम देने वाले बाबर मोहसिन भगवाला, सदाकत अली और मतलूब आलम को सात साल की सजा सुनाई गई थी।













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