फर्जी इंकाउंटर में यूपी नंबर 1, तीन साल में 120 हत्‍याएं

Fake encounters list: Uttar Pradesh Police on top, followed by Manipur
लखनऊ। वारदातों के फर्जी खुलासे और हत्‍या को खुदकुशी में तब्‍दील करने में माहिर उत्‍तर प्रदेश पुलिस के खाते में अब एक और उपलब्धि जुड़ गई है। अगर दूसरे शब्‍दों में कहें तो यूपी पुलिस के दागदार दामन पर एक और धब्‍बा लग गया है। यह धब्‍बा फर्जी मुठभेड़ मामले में है। जी हां उत्‍तर प्रदेश पुलिस फर्जी मुठभेड़ मामले में अव्‍वल है। ये बात हम नहीं बल्कि राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आकड़े कह रहें हैं।

राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आकड़ों के अनुसार यूपी में फर्जी मुठभेड़ मामले में 3 साल के दौरान 120 लोग मारे जा चुके हैं। बात अगर सिर्फ वर्ष 2011 की करें तो अबतक 6 बेगुनाह लोगों को यूपी पुलिस ने अपने गोलियों का शिकार बनाया है। मारे गये लोगों के परिजनों ने राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग से न्‍याय की गुहार की है।

बात तो पहले पायदान की हो गई मगर क्‍या आपको पता है कि दूसरे और तीसरे पायदान पर कौन सा प्रदेश है। अगर नहीं तो आईए हम आपको बताते हैं कि फर्जी मुठभेड़ मामले में मणिपुर दूसरे और पश्चिम बंगाल तीसरे पायदान है। पीछले तीन सालों में राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मिली शिकायत ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।

वर्ष 2010-11 में आयोग को मिली शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि यूपी पुलिस ने फर्जी इंकाउंटर में करीब 40 लोगों को मार डाला है। इसी प्रकार 2008-09 और 2009-10 में यह संख्‍या 71 रही। यूपी के बाद मणिपुर ऐसा राज्य है, जहां फर्जी मुठभेड़ के सर्वाधिक मामले हैं। यहां तीन साल में 60 लोग मारे जा चुके हैं। उग्रवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन साल के दौरान फर्जी मुठभेड़ के 14 मामले दर्ज किए गए। नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में पिछले तीन साल के दौरान फर्जी मुठभेड़ के 11 मामलों की खबर है।

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