सदन में पेश होते ही टीम अन्ना ने जलाया सरकार का लोकपाल बिल

सरकारी लोकपाल का विपक्षी दलों ने भी विरोध जताया। बीजेनी ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की मांग करते हुए इसके पेश किए जाने का विरोध किया। लोकपाल बिल लोकसभा में पेश होते ही हंगामा शुरू हो गए। जिस वजह से लोकसभा की कार्रवाई लंच तक के लिए स्थगित करनी पड़ी थी। बिल के पेश होने के बाद इसे हर बार की तरह संशोधित होने के लिए स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया।
वहीं लोकपाल बिल के पेश होने के बाद अन्ना हजारे ने अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लोकपाल बिल को ही पास किया जाना चाहिए। सरकारी लोकपाल बिल और अन्ना हजारे की सिविल सोसाइटी के लोकपाल बिल में कई मतभेद हैं। सोसाइटी ने प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में रखने की मांग की थी जबकि सरकार ने इन्हें इसके दायरे के बाहर रखा है।
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वैसे भी यह पहला मौका नहीं है जब लोकपाल बिल को लोकसभा मे पेश किया गया हो। सबसे पहले 1969 में शांति भूषण ने लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इसे 1971, 77, 85, 89, 96, 98, 2001, 2005 और हाल ही में 2008 में लोकसभा में पेश किया जा चुका है। हर बार इसे संषोधन के लिए कमेटी के पास भेज दिया जाता है। यह बिल अभी तक राज्यसभा में पेश नहीं हो पाया है। अब देखना होगा कि इतने हो हल्ले के बाद इस बार पेश हुए लोकपाल बिल का भी वहीं हाल होगा जो पहले हुआ है।












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