सरकार के लोकपाल बिल पर ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव

आइये जानते हैं गोचर ग्रहों की चाल- दिनांक-4 अगस्त 2011, दिन-गुरूवार, समय-प्रातः 11 बजे, स्थान-दिल्ली, जिस समय लोकपाल बिल संसद में पेश करने के लिए सदन में चर्चा शुरू होगा। उस समय क्षितिज पर- लग्न- कन्याए राशि- कन्या। नक्षत्र- हस्त का तृतीय चरण चल रहा होगा।
लग्नेश व राज्येश बुध वक्री होकर द्वादश भाव में स्थित है। बुध एक युवराज व नपुंसक ग्रह है, जिससे यह प्रतीत होता है कि सरकार अपने वर्चस्व को लेकर असमंजस की स्थिति में बनी रहेगी। कन्या लग्न द्विस्वभाव एंव स्त्री राशि होने के फॅलस्वरूप विपक्ष के तल्ख तेवरों का जवाब देने में असहज महसूस करेगी।
सूर्य व चन्द्रमा ये दोनों ग्रह सरकार और राजनीति के कारक है तथा पंचम स्थान नीति और न्याय का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य द्वादेश होकर एकादशेश भाव में शुक्र के साथ स्थित होकर उसकी सप्तम दृष्टि पंचम स्थान पर पड़ रही है। पंचमेश शनि प्रथम भाव में चन्द्रमा के साथ बैठा है तथा उसकी दशम दृष्टि राज्य भाव पर पड़ रही है। सूर्य ग्रह सरकार का कारक और शनि ग्रह नीति व न्याय का कारक है।
ये दोनों ग्रह आपस में शत्रु है एंव शनि की जिस भाव पर दृष्टि पड़ती है उस भाव की हानि होती है। अतः सरकार अपना पक्ष बनाये रखने के लिये भरसक कोशिश करेगी परन्तु विपक्ष सरकार के हर मनसूबे पर पानी फेर देगी। अन्ततः कुछ ऐसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं, कि संसद की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ सकती है और सरकार अपने उद्देश्यों में नाकाम साबित होगी।
अब यदि ज्योतिष की बात माने तो लोकपाल बिल के पेश होने से पहले ही उस पर ग्रहण लग चुका है। सही मायने में यह अन्ना हजारे की टीम के लिए खुशी की बात होगी, क्योंकि उनकी टीम व उनके लाखों समर्थक चाहते हैं कि सदन में सरकार का बिल पारित नहीं हो।












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