मैं कोई आतंकवादी तो नहीं हूं: पीएल पुनिया

Uttar Pradesh: CSMMU requests Punia to postpone visit
लखनऊ। प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रों व कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने आए एससी एसटी आयोग के अध्यक्ष को ही आने से रोकने का प्रयास किया गया। पीएल पुनिया का प्रस्तावित चिविवि दौरा रदद हो जाए इसके लिए चिविवि प्रशासन ने पुनिया को अनुरोध पत्र लिखा। उस पर भी जब बात नहीं बनी तो विवि परिसर में अवकाश घोषित कर गेट पर ताला लगवा दिया गया।

चिविवि गेट पर भारी पुलिस बल देख पुनिया ने कहा कि क्या मैं कोई आतंकवादी हूं जो इतनी सुरक्षा की जा रही है। दौरे के लेकर अधिकारियों के रवैये को देखते हुए कांग्रेस सांसद और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष पी एल पुनिया ने इन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार पर आयोग के खिलाफ उपेक्षा का रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुये उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इशारे पर कुछ अधिकारियों ने आयोग के सदस्यों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार कर रही है और उसके पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों में अड़चन पैदा करने की कोशिश की है।

आयोग इसकी जांच करायेगा और सिविल कोर्ट के समान प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ समन जारी करेगा। छत्रपति शाहूजी महराज चिकित्सा विश्वविद्यालय पहुंचे श्री पुनिया ने संस्थान में अध्ययनरत दलित छात्रों से मुलाकात की। बड़ी संख्या में पीएसी और पुलिस के जवान मौजूद थे और कालेज में अवकाश घोषित कर दिया गया था। श्री पुनिया ने कहा कि मैं कोई आतंकवादी तो हूं नहीं जो इतनी पुलिस लगायी गयी है।

ज्ञात हो कि प्रशासन ने इससे पूर्व आयोग के सदस्यों को राजकीय अतिथि गृह में यह तर्क देते हुये ठहरने से मना कर दिया कि कोई कमरा खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पहला वाकया नहीं हैं, इससे पहले भी कई बार आयोग के साथ ऐसा व्यवहार किया जा चुका है। उन्होंने मकड़ी की कहानी सुनाते हुए कहा कि वह लगातार प्रयास करती रही और एक दिन सफल हो गयी था वे कुछ ऐसी ही दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दलील दी गयी कि आगामी पांच अगस्त से विधानमंडल का सत्र है जिसके काम में अधिकारी व्यस्त हैं। पुनिया ने यहां छात्रों से मुलाकात कर बताया कि उनके दलित गरीब छात्रों ने शिकातय की है कि प्रशासन जानबूझकर छह नंबर से फेल कर देता है ताकि काग्रेस के बावजूद वह पास न हो सकें। पुनिया के मुताबिक ऐसी शिकायत 78 छात्रों ने की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीडऩ मामलों में अव्वल है।

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