चक्कर क्या है.. बार-बार गायब क्यों हो जाते हैं बालकृष्णन?
गौरतलब है कि रामदेव के करीबी बालकृष्णन के खिलाफ सीबीआई ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया है और उसके बाद वो बालकृष्णन को खोज रही है लेकिन बालकृष्णन कहीं चले गये हैं। उनके लापता होने की रिपोर्ट खुद उनके बा़डीगार्ड ने थाने में दर्ज करवाई है।
आपको बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं हैं जब बालकृष्णन गायब हुए हैं। थोड़ा पीछे चलते हैं। बाबा रामदेव 4 जून को दिल्ली के रामलीला मैदान पर काले धन और भ्रष्ट्राचार के खिलाफ अनशन पर बैठे थे। तभी 5 जून की रात को दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव के अनशन पर लाठियां बरसाई थी।
उसके बाद कुछ देर के लिए बाबा रामदेव और बालकृष्णन गायब हो गये थे। लेकिन थोड़ी ही देर बाद बाबा रामदेव प्रकट हुए वो भी पुलिस वालों के साथ जो उन्हें दिल्ली की सीमा से बाहर निकाल कर सीधे वायुयान के जरिये पहले देहरादून फिर हरिद्वार पहुंचा आये थे।
लेकिन बालकृष्णन तीन दिनों के लिए लापता ही थे। पुलिस वाले उन्हें खोजते ही रहे लेकिन बाबा ये कहते रहे कि उनके सखा किसी सुरक्षित जगह है और वो एक गुप्त मिशन पर हैं। लेकिन तीन दिन बाद बालकृष्णन खुद लोगों के सामने आ गये और कहने लगे कि वो सुरक्षा कारणों से लोगों के सामने नहीं आ रहे थे, लेकिन वो जहां थे वहां घायलों की सेवा कर रहे थे।
संदेह यहीं पर उठता है कि बाबा तो कह रहे थे कि वो एक गुप्त मिशन पर हैं जबकि बालकृष्णन के मुताबिक वो घायलों की सेवा कर रहे थे। आखिर दोनों के बयान में इतना विरोधाभास क्यों हैं? आखिर दोनों में से कोई एक तो सत्य छुपा रहा है। बालकृष्णन के गायब होने के बाद ही उनके फर्जी दस्तावेज का मामला सामने आया था। उनकी नागरिकता पर प्रश्न उठा था। इस बार भी मामला दर्ज हुआ है, तो आचार्य गायब हो गये हैं।
आखिर वो बार-बार यूं आंख-मिचौली क्यों खेल रहे हैं? आखिर ऐसा क्या है जो वो बताना नहीं चाह रहे हैं? ये बातें एक नयी कहानी को जन्म दे रही हैं खैर सच क्या है? और झूठ क्या? इस बारे में तो कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन बालकृष्णन के गायब होने से कई सवालों के जन्म हो चुके हैं।
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