रेवती रमण, अशोक अर्गल की स्टोरी अलग-अलग

Rewati Raman
नई दिल्ली। नोट के बदले वोट मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद रेवती रमण सिंह और भाजपा सांसद अशोक अर्गल से दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग पूछताछ की। इस मुद्दे पर दोनों ने ही अलग-अलग कहानी सुनाई। दोनों के बयान में कोई तालमेल नहीं मिल पा रहा है।

रेवती रमण पर 2008 के इस घोटाले में मध्यस्थता करने का आरोप है। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि रेवती रमण से क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने करीब 90 मिनट तक पूछताछ की। 68 वर्षीय रमण ने पूछताछ में कहा कि अशोक अर्गल और दो अन्य भाजपा सांसदों ने उनसे संपर्क कर सपा में शामिल होने की इच्छा जाहिर की।पूछताछ के बाद रमण ने पत्रकारों से कहा कि मैंने पुलिस को वही बताया जो मैंने इससे पहले मामले में गठित संसदीय पैनल को बताया था।

उनसे रुपये के बारे में पूछताछ की गई, साथ ही उनसे पूछा गया कि क्या वह भाजपा नेताओं के संपर्क में थे। क्या उनकी अमर सिंह से मुलाकात करवाई थी। क्या अमर सिंह के घर से रुपये ले गए थे। इन सब सवालों का उन्होंने गोलमोल जवाब दिया।

इसके बाद करीब चार बजे भाजपा सांसद अशोक अर्गल क्राइम ब्रांच के कार्यालय पहुंचे। अशोक से सुहेल हिंदुस्तानी संजीव सक्सेना, अमर सिंह और रेवती रमण सिंह से संपर्क के बारे में पूछा गया। उनसे पूछा गया कि अमर सिंह व रेवती रमण सिंह ने रुपयों के बाबत उनसे संपर्क किया था या नहीं। उन्होंने भी संसदीय कमेटी के सामने दिए बयान को ही दोहराया।

शाम करीब साढ़े पांच बजे बाहर निकलने के बाद उन्होंने रेवती रमण सिंह पर आरोप लगाया कि 21 जुलाई की देर रात रेवती रमण उनके घर पर आए थे। इसके पीछे उनका मकसद क्या था। इसका जवाब मिलने पर सब कुछ साफ हो जाएगा। अर्गल ने विश्वास मत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्हें पक्ष में वोट देने के लिए मिले कथित एक करोड़ रुपये लोकसभा के पटल पर रखकर सनसनी फैला दी थी।

पुलिस इस मामले में सपा के पूर्व नेता एवं सांसद अमर सिंह से भी पूछताछ कर चुकी है। अमर सिंह से शुक्रवार को पुलिस ने लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की थी। साथ ही उनके कथित सहयोगी रहे संजीव सक्सेना और भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व कार्यकर्ता सुहेल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस ने रेवती रमण से सुहेल हिंदुस्तानी के साथ टेलीफोन पर हुई उनकी बातचीत के बारे में भी सवाल पूछे। लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी से भी पूछताछ किए जाने की संभावना है। इन पर मनमोहन सिंह सरकार के वर्ष 2008 के विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के सांसदों की खरीद फरोख्त करने के आरोप हैं।

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