दिल्ली सेक्स रैकेट: कॉल गर्ल्स में मालदार ग्राहक फंसाने का कम्पटीशन

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान गिरफ्तार कॉलगर्ल्स ने इस तरह के अन्य इंटरनैशनल सेक्स रैकेटों के बारे में क्राइम ब्रांच को जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पूर्व सोवियत संघ से अलग हुए देशों उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि में बेरोजगारी की वजह से बहुत सी लड़कियां इन रैकेटों के चंगुल में फंस जाती हैं। बहुत सी लड़कियां ईजी मनी कमाने के मकसद से इन रैकेटों से कॉन्ट्रैक्ट करती हैं।
टूरिस्ट वीजा पर विदेशों से बुलाईं जाती थी कॉल गर्ल्स
पूछताछ के दौरान पुलिस को इस बात का पता चला कि जिस्म का सौदा करने वाली यह लड़कियां टूरिस्ट वीजा पर भारत आती थी। भारत में यह महज 4 से 6 महिनों के लिये आती थी और फिर वापस अपने देश उजबेकिस्तान चली जाती थी। पुलिस ने बताया कि उनके भारत आने का खर्चा और वापस जाने का खर्चा गिरोह की सरगना संभालती थी। पुलिस के आला अधिकारी ने बताया कि कभी-कभी तो ऐसा होता था कि पुराने ग्राहकों के मांग पर उन्हें फौरन बुला लिया जाता था और ग्राहक के साथ दो तीन दिन के लिये भेज दिया जाता था।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार की गई छह लड़कियों में से सिर्फ एक से पासपोर्ट बरामद हो सका है। उसके पास वैलिड टूरिस्ट वीजा मिला। बाकी पांच लड़कियों ने पुलिस को पासपोर्ट नहीं दिए। इसकी वजह यह है कि केस के दौरान पासपोर्ट सीज हो जाते हैं, जिस कारण ये लड़कियां भारत से बाहर नहीं जा पातीं। इन पांच लड़कियों के खिलाफ देह व्यापार निरोधक कानून के साथ फॉरनर्स एक्ट के तहत भी एफआईआर दर्ज की गई है।
बारह दिन में पकड़े गए चार सेक्स रैकेट
राजधानी में महज 12 दिनों में पुलिस ने चार रैकेट का पदार्फाश किया । गत 12 जुलाई को दक्षिण जिला पुलिस ने महंगी कारों में लड़कियों को पहुंचाने वाली नगमा खान के रैकेट की पांच हाई प्रोफाइल कॉलगर्ल पकड़ी थीं। इसके बाद अपराध शाखा ने 18 जुलाई को साउथ एक्सटेंशन में दबिश देकर छह विदेशी कॉल गर्ल और दलाल के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया। विदेशी कॉलगर्ल को दलाल आशीष एक लाख रुपये महीने के करार पर दिल्ली लाया था। इसके बाद बाहरी दिल्ली जिला में पुलिस ने 19 जुलाई को दो महिला दलालों को गिरफ्तार करने के साथ ही पांच कॉलगर्ल को गिरफ्तार किया था। ये उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की रहने वाली हैं। इन्हें 50 हजार रुपये महीने पर रखा गया था।
एक दिन में 1 लाख रुपये कमाती थी पकड़ी गई कॉल गर्ल्स
आप शायद इस बात को सुनकर चौक जायेंगे कि पुलिस ने जिन लड़कियों को गिरफ्तार किया है उनकी एक दिन की कमाई 75 हजार से लेकर 1 लाख रुपये थी। गिरोह की सरगना एक लड़की के लिए एक रात के 35 से 40 हजार रुपये लेती थी। सौदा पुराने व भरोसेमंद ग्राहकों के जरिये होता था। ग्राहक सप्ताहांत के दो दिन के लिए किसी लड़की को बाहर ले जाता तो उससे अधिक राशि ली जाती थी।
एक दिन में 4 या 5 ग्रहकों को कॉल गर्ल्स करती थी खुश
दिल्ली आने के बाद लड़कियों की रिहाइश, खाने और ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम रैकेट की जिम्मेदारी होती है। हर लड़की को एक दिन में कम से कम चार-पांच कस्टमर के पास जाना होता है। इससे ज्यादा जगह जाने के लिए कोई लड़की तैयार नहीं होती। धंधे का एक नियम था कि अगर किसी लड़की को ग्राहक पंसद (शक्ल और सूरत में) नहीं आता था तो वह उनके साथ नहीं जाती थी।
जिस्म बेचने वालों के लिये पनाहगार बनी दिल्ली
दिल्ली में एक के बाद एक अर्न्तराष्ट्रीय सेक्स रैकेट के खुलासों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर जिस्म के सौदागरों ने दिल्ली को ही अपना सॉफ्ट टारगेट क्यों बना लिया है। ऐसे में तो साफ जाहिर होता है कि दिल्ली जिस्म बेचने वालों के लिये पनाहगार बन चुकी है। दिल्ली के पॉश इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे देह व्यापार के धंधे ने दिल्ली पुलिस की नींद हराम कर दी है।
मालूम हो कि 18 जुलाई को पुलिस ने साउथ एक्सटेंशन में दबिश देकर छह विदेशी कॉल गर्ल और दलाल के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया। विदेशी कॉलगर्ल को दलाल आशीष एक लाख रुपये महीने के करार पर दिल्ली लाया था। इसके बाद बाहरी दिल्ली जिला में पुलिस ने 19 जुलाई को दो महिला दलालों को गिरफ्तार करने के साथ ही पांच कॉलगर्ल्स को गिरफ्तार किया था। ये उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की रहने वाली हैं। इन्हें 50 हजार रुपये महीने पर रखा गया था।
ग्राहकों को अपनी ओर खिचनें की होड़ में हो रहे है सेक्स रैकेट के भंडाफोड़
इन दिनों सेक्स रैकेटों की ज्यादा धरपकड़ की वजह इन रैकेटों में आपसी कॉम्पिटिशन बताया जा रहा है। एक गिरोह के पिंप पुलिस वालों से गठजोड़ कर दूसरे रैकेट की लड़कियों को गिरफ्तार करवा रहे हैं। पिछले दिनों महरौली से गिरफ्तार नगमा खान ने आरोप लगाया था कि उसे पुलिस वालों से मिलकर सोनू पंजाबन ने गिरफ्तार कराया था।
उजबेकिस्तान की रहने वाली दलाल ने भारतीय से की थी शादी
पुलिस की गिरफ्त से दूर सेक्स रैकेट की सरगना जुलेखा उर्फ जूली भारत में लम्बे समय तक रह कर इस धंधे को चलाने के लिये एक भारतीय से शादी कर ली थी। उसने ग्रेटर कैलाश पार्ट-2, सफदरजंग एन्क्लेव और अर्जुन नगर में ठिकाना बनाया था। ग्रेटर कैलाश के फ्लैट को उसने 50 हजार रुपये महीने और सफदरजंग एन्क्लेव व अर्जुन नगर के फ्लैट को 20-20 हजार रुपये महीना किराए पर लिया हुआ था। सरगना उजबेकिस्तान से नियमित रूप से युवतियों को दिल्ली बुलाती थी।












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