सावन का महीना ..बॉलीवुड का सुपरहिट फंडा

सावन बरसे...धड़के दिल...क्यों ना घर से निकले दिल...वाकई में सावन ऐसा ही है हर किसी को पागल बना देता है। तभी तो सावन से खासा लगाव है हमारे बॉलीवुड को। बालीवुड फिल्मकारों का सावन और बारिश से प्रेम जगजागिर है।

कहा जाए तो सावन और बरसात ने भारतीय फिल्मकारों की कल्पनाशीलता को एक नई उड़ान दी है। रोमांस, जुदाई, छेड़छाड़ को दर्शाने के लिए बरसात से अच्छा जरिया कोई हो ही नहीं सकता है। ऐसे में संगीतकारों और गीतकारों ने अपनी मेहनत से वाकई में रिमझिम सावन के गानों को बेहतरीन कंपोजिशन में बदल दिया है।

सावन ने किया मदहोश...

शोमैन राजकपूर ने अपनी फिल्मों में सावन और बरसात को रूमानी अंदाज में पेश किया। फिल्म श्री 420 ´ में एक ही छतरी के नीचे भीगे-भीगे राज-नर्गिस का गाना प्यार हुआ इकरार हुआ´...आज भी लोगों की जुबान पर है। फिल्म बरसात की एक रात´ का गीत जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात´..... मन के तारों को आज भी छेड़ देता है।

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ की फुल कॉमेडी नमकहलाल´..आज रपट जाएं तो हमें न उठइयो.. बरसात के सभी गानों में आज बी नंबर वन है। अमिताभ की ही मंजिल फिल्म में ..रिम झfम गिरे सावन, सुलग सुलग जाए मन... बूंदाबांदी के दौरान मुंबई की सड़कों और चौपाटी का मनोहर दृश्य पेश किया गया। फिल्म रोटी कपड़ा और मकान´ में मनोज कुमार को बरसात का लुत्फ उठाने के लिए प्रेरित करती जीनत अमान जब हाय हाय ये मजबूरी, ये मौसम और ये दूरी..´ गाती है तो दर्शकों को भी नायिका की मजबूरी पर तरस आ जाता है।

सावन है कामयाब फंडा

फिल्म बेताब´ में आर डी बर्मन द्वारा कंपोज किया गाना-बादल यूं गरजता है....अपने संगीत और स्पेशल इफेक्ट्स के लिए सबको याद होगा। फिल्म मिलन´ का गीत-सावन का महीना पवन करे सोर....सुनने के लिए आज भी लोगों के कान तरसते हैं।

चुपके चुपके´ का गीत-अब के सजन सावन में ....फिल्म सावन को आने दो´ का शीर्षक गीत-तुम्हें गीतों में ढालूंगा, सावन को आने दो...., फिल्म जुर्माना´ का गीत-सावन के झूले पड़े-तुम चले आओ...., फिल्म ये दिल्लगी´ का गीत-देखो जरा देखो बरखा की झड़ी....अफसाना प्यार का´ का गाना-टिप टिप टिप टिप बारिश शुरू हो गई....., फिल्म दिल तो पागल है´ का गीत-ओ सावन राजा कहां से आए तुम.... सभी श्रोताओं के मन में बगैर सावन बरसात की अनुभूति कराते रहे हैं और इसीलिए ये यादगार बन गए हैं।

आजादी के समय का वर्णन करती फिल्म 1947 ए लव स्टोरी´ में पीली साड़ी में लिपटी मनीषा कोइराला ने रिमझिम रिमझिम´ गाने से रोमांस की नई परिभाषा गढ़ दी तो फिल्म मोहरा´ के गीत टिप टिप बरसा पानी...में रवीना टंडन ने बिंदासपन की नई इमेज पेश की है।

ये तो केवल सार है उन यादगार फिल्मों का, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। लेकिन कुल मिला कर बात सिर्फ इतनी ही है कि सावन का मतलब प्यार और मदहोशी है तो चलिए आप भी भीग जाइये सावन की बारिश में और जीतिये अपने हमसफर का दिल....

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