मानवरहित क्रॉसिंग मतलब ट्रैक पर दौड़ती मौत

अगर पीछले 6 सालों की बात करें तो मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर दर्जनों ऐसी वारदाते हो चुकी है जिसमें लगभग 250 से ज्यादा लोगों की मौत और लगभग इतने ही लोग घायल हो चुके हैं। ये तो वो आंकड़े हैं, जिनमें एक बार में दर्जन से ज्यादा मौतें हुईं, रोजाना एक-दो की मानवरहित क्रॉसिंग की बलि चढ़ते हैं, जिनके आंकड़े महज रेलवे और पुलिस की फाइलों में दफ्न हो जाते हैं।
इन सारी बातों से बेखबर रेल प्रशासन मरने वालों को ज्यादा और घायलों को कम मुआवजा देकर अपना पल्ला झाड़ लेती है मगर मानवरहित क्रॉसिंग पर उसका ध्यान नहीं जाता। अब सोचने वाली बात यह है कि अगर रेलवे प्रशासन समय रहते मानवरहित क्रॉसिंग पर अपना ध्यान केन्द्रित कर लेती तो शायद उत्तर प्रदेश के कांशीराम नगर जिले में रेलवे ट्रैक पर 38 लोगों का कब्र नहीं बनाता। तो आइए पीछले 6 सालों के अंदर मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुए दर्जनों वारदातों पर नजर डालते हैं।
4 फरवरी 2005- नागपुर में शादी समारोह से लौट रहे ट्रैक्टर को तेज रफ्तार रेलगाड़ी ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में 52 लोगों की मौत हो गई थी। खास बात यह है कि यह हादसा मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुआ था।
1 दिसम्बर 2006- बिहार के भागलपुर जिले में 150 वर्ष पुराने एक पुल का हिस्सा गिर गया जिससे पुल के उपर से जा रही रेलगाड़ी हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में 35 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गये थे।
16 अप्रैल 2006- तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में थिरुमतपुर के पास मानवरहित क्रासिंग पर हुए हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी।
23 फरवरी 2009- उड़ीसा के धांगीरा इलाके में एक वैन और रेलगाड़ी की टक्कर होने से 14 लोगों की मौत हो गई। सभी एक शादी समारोह से लौट रहे थे। और मानवरहित क्रासिंग पर वैन अचानक खराब होकर बंद हो गई थी।
14 नवम्बर 2009- जयपुर से दिल्ली जा रही मांडूरी एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने से 7 लोगों की मौत हो गई थी।
21 अक्टूबर 2009- उत्तर प्रदेश के बंजाना में गोवा एक्सप्रेस और मेवाड़ एक्सप्रेस के बीच टक्कर हो जाने से उसमें सवार कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई।
9 मार्च 2010- उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में उटारीपुरा के निकट एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और रेलगाड़ी के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई।
19 जुलाई 2010- पश्चिम बंगाल के सैथिया में वनांचल एक्सप्रेस और उत्तरबंग एक्सप्रेस के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई।
3 जून 2010- तमिलनाडु में एक मिनी बस और रेलगाड़ी के बीच टक्कर हो जाने से 5 लोगों की मौत हो गई।
20 सितम्बर 2010- एक रेलगाड़ी और एक मालगाड़ी के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई और 53 घायल हो गए। यह हादसा मध्य प्रदेश के भदरवाह रेलवे स्टेशन पर हुआ था।
22 मई 2010- बिहार के मधुबनी जिले में एक मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर हुए रेल हादसे में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई।
29 जनवरी 2011- कानपुर के भोगनीपुर तहसील में एक मानवरहित रेलवे क्रासिंग के पास जनसाधारण एक्सप्रेस ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को टक्कर मार दी जिससे 2 लोगों की मौत हो गई।
6 जुलाई 2011- उत्तर प्रदेश के कांशीराम नगर जिले में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर तेज रफ्तार ट्रेन ने बारत से लौट रही बस को टक्कर मार दी जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई और लगभग 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गये।
आपको बताते चलें कि बुधवार को यूपी के कांशीराम नगर में जो हादसा हुआ उसके लिये मनमोहन सिंह ने मुआवजे की घोषणा की है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये देने की बात कही है। मगर इन सबके बीच ध्यान देने योग्य बात यह है कि सरकार ने रेलवे प्रशासन पर जरा भी ध्यान नहीं दिया और मानवरहित क्रॉसिंग के बारे में कोई बात नहीं की। सरकार का रवैया अगर ऐसा ही रहा तो रेलवे ट्रैक पर कब्र बनने का सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा और सरकार नकद मुआवजे की घोषणा कर आम आदमी की जिदंगी से खेलती रहेगी।












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