गे समुदाय पर टिप्पणी करने वाले आजाद ने मीडिया को कोसा

गुलाम नबी आजाद ने अपने बयान को मीडिया के द्वार तोड़ा-मरोड़ा हुआ बताया और कहा कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। जिसके लिए मंगलवार शाम को गुलाम ने एक पत्रकार वार्ता करके अपनी सफाई पेश की। मेरे बयान को सही अर्थो में नहीं लिया गया। कुछ लोगों का कहना है कि यह अप्राकृतिक है, कुछ इसे प्राकृतिक बताते हैं। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इसके खिलाफ एक कानून होना चाहिए।
गुलाम ने कहा कि उन्हें गे समुदायनसे कोई नफरत नहीं है बल्कि वो देश को निरोग रखने हेतु अपने बयान दे रहे थे क्योंकि समलैंगिकता को कुछ लोग 'रोग' और 'अप्राकृतिक' बताते हैं। समलैंगिकता को लेकर कई देशों में कानून है और कुछ देशों में नहीं है। भारत में भी ऐसा होना चाहिए बशर्ते कि समलैंगिक खुलकर सामने आये।
गौरतलब है कि एचआईवी/एड्स विषय पर आधारित एक सम्मेलन में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि समलैंगिकता एक रोग है जो अप्राकृतिक है और यह भारत के लिए ठीक नहीं है। समलैंगिक सम्बंध कहां बन रहे हैं इसकी पहचान करने में हम सक्षम नहीं हैं क्योंकि इसके बारे में काफी कम बताया जाता है।
महिलाएं तो फिर भी पकड़ में आ जाती है लेकिन पुरूषो के बारे में हमें दिक्कत होती है। क्योंकि हमारे देश में ये रिश्ते छिपकर बनाये जाते हैं। जिसके बाद से गुलाम की किरकिरी होनी शुरू हो गयी थी। समलैंगिक समुदाय, कार्यकर्ताओं, हस्तियों ने कड़ी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। यहां तक कि एचआईवी/एड्स पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र के विभाग यूएनएड्स ने मंगलवार को एक बयान जारी कर गुलाम नबी आजाद की तीखी आलोचना की थी। गे समुदाय ने आजाद को माफी मांगने के लिए कहा है।












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