अमेरिका से रिसर्च के लिये बिहार आई छात्रा को नक्सलियों ने बंधक बनाया

उल्लखनीय है कि बैगलुरु की रहने वालीं जूही नक्सलियों पर रिसर्च करने के लिए 19 जून को यहां आई थीं। रिसर्च के सिलसिले में जूही नक्सलियों से बात करना चाहती थीं। एकता परिषद के सदस्य प्रदीप कुमार दास के साथ जूही मंगलवार को बाइक से जंगल की ओर गईं। जूही नक्सलियों पर रिसर्च कर रही थी। जूही स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय न्यूयॉर्क से समाजशास्त्र में पीएचडी कर रही है.
जुमई जहां नक्सलियों ने जूही को बंधक बनाया है वहां वह पिछले दो साल से आ रही थी। इससे पूर्व भी वह जमुई के नक्सल प्रभावित इलाकों में जाकर नक्सलियों पर रिसर्च करने के लिए उनसे संपर्क करने के प्रयास कर चुकी थी मगर सफलता हाथ नहीं लगी थी। इसे बाद दोबारा स्कालर मिलने पर वह बीते 19 जून को जमुई आई। वह खैरा थाना क्षेत्र के गढ़ी इलाके में चल रहे एकता परिषद नाम के एनजीओ के सदस्य प्रदीप दास के संपर्क में थी। उन्हीं के साथ वह महुलियाटांड गई थी।
26 जून को जूही और प्रदीप मोटरसाइकिल से जंगल की ओर निकले थे उसके बाद से उनका पता नहीं चल पाया था। बताया जा रहा है कि प्रदीप के परिजनों के पास नक्सलियों का फोन आया था कि वह लोग आएं और जूही और प्रदीप जो जानकारी दे रहे हैं वह सही है या नहीं इसकी पुष्टि करें। नक्सलियों ने दोनों के पुलिस का मुखबिर होने का अंदेशा जताया है। फिलहाल जूही और प्रदीप नक्सलियों के कब्जे में हैं।
पुलिस को इस बात की सूचना मिल चुकी है। आला अधिकारी और प्रशासन नक्सलियों से बात करने का प्रयास कर रहा है। प्रशासन के आला अधिकारियों का कहना है कि उनसे संपर्क होते ही बात की जायेगी और उनकी मांगों को सुना जायेगा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नक्सलियों ले किसी मांग को लेकर नहीं बल्कि पुलिस के मुखबिर होने की शक पर बंधक बनाया है। लोगों का यह भी मानना है कि जब उन्हे इस बात का भरोसा हो जायेगी तो वह उन्हें मुक्त कर देंगे।












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