लोगों की कसौटी पर खरा उतरेगा गांधी पुत्र 'राहुल'!

बेंगलुरू। आज यानी 19 जून को कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी 41 साल के हो गये है। उम्र के इस पड़ाव पर पहुँचने के बाद देश को उनकी शादी का और कांग्रेस को उनके प्रधानमंत्री बनने का इंतजार हैं। राजनीति को विरासत के रूप में पाने वाले राहुल ने राजनीति की एक नयी तस्वीर लोगों के सामने पेश की है उनकी राजनीति किसी मंच से शुरू नहीं होती और ना ही किसी भाषण से। सत्ताधारी होने पर भी उनका पीएम की कुर्सी पर ना बैठना और ना ही कोई मंत्रालय मांग कर अपनी पैठ बनाना, से राहुल लोगों के दिलों के करीब आ गये हैं।

41 के हुए कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी

खुद को गांधी पुत्र नहीं बल्कि भारत मां का पुत्र कहने वाले राहुल गांधी अपने आप को गरीबों और आम जनता का मसीहा कहलाने में लगे हुए हैं। इसलिए वो कभी लोकल ट्रेन में यात्रा करते हैं तो कभी बाईक पर भट्टा परसौल पहुँच जाते हैं। राहुल के राजनीतिकोश में ना तो किसी मंत्री की पैरवी है और ना ही किसी नेता की सिफारिश, इसके बावजूद वो देश से गरीबी, भूख, अपराध और भ्रष्टाचार को दूर करने का दावा करते हैं।

राजनीति का ककहरा सीखें राहुल : विपक्ष

जिसके लिए कभी उन्हें विरोधी गण राजनीति का बच्चा और अपरिपक्क इंसान भी कहते हैं। डिंपल गर्ल और चाकलेटी छवि के मालिक राहुल गांधी को भारत लगभग अपना लाल मान चुका है। युवा पीढ़ी को देश की प्रगति और तरक्की कहने वाले राहुल गांधी से आज देश को बहुत उम्मीदें हैं। साल 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस की जीत के पीछे राहुल की युवा ब्रिगेड का बहुत बड़ा हाथ था सबको ये लगने लगा था कि शायद आज की राजनीति जातिप्रथा और धर्म के नाम से हट कर विकास के नाम पर होने लगी है।

देश को नई सोच-दिशा देने का वायदा : राहुल

हालांकि राहुल का चुनावी मुंद्दा चुनाव के बाद निर्जीव ही जान पड़ता है। घोटालों की जमात में फंसी कांग्रेस ना तो आज विकास की बात कर रही है और ना ही प्रगति की राह पर चल रही है, हां इतना जरूर है कि वो अपने आप को पाक-साफ करने में जुटी हुई लेकिन ताज्जुब यह है कि कांग्रेस का युवराज इस मौके पर खामोश है, क्या उसकी खामोशी सरकार की नाकामी का सूचक है या फिर वो मौन रह कर वो कोई सांकेतिक लड़ाई लड़ रहा हैं। ये सवाल हर उस युवा के दिल में हैं जिसने आम चुनावों में राहुल के नाम पर कांग्रेस पर मुहर लगायी थी।

मौन क्यों हैं राहुल गांधी???

19 जून 1970 को जन्में और यूपी के अमेठी से दूसरी बार चयनित सांसद राहुल गांधी का अदाजे बयां उनके पिता राजीव गांधी के कलाम से काफी कुछ मिलता जुलता है, राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी की तरह ही सोचते हैं, वो भी राजीव की ही तरह प्रगतिशील है और नई ऊर्जा और तकनीकि सोच में भरोसा करते हैं। राजीव ने हमें आईटी और विज्ञान के बारे में एक नई सोच दी थी तो राहुल भी अपनी युवा ब्रिगेड के साथ देश की तस्वीर बदलने की बातें करते हैं। राहुल के भाषण में देश के गड़े मु्द्दे नहीं बल्कि नये सिंद्धांत और नये प्रोजेक्ट होते हैं।

पिता राजीव की तरह तकनीकि की बात करते हैं

इतना तो तय है कि कैंब्रिज से पढ़े राहुल गांधी को लोगों के दिलों में जगह तो मिलने लगी है जिसके चलते ये लगने लगा है कि शायद उन्हें एक और मौका देश की जनता दे दें लेकिन सच्चाई ये ही है कि राहुल को अभी भी अपने आप को उस कसौटी पर खरा उतारना होगा जो उन्हें उस पीएम की कुर्सी की ओर सीधे ले जाता है जो लोगों के विश्वास और प्यार से होकर गुजरता है । उनके दम पर पार्टी देश में मजबूत जनाधार जीत सकती है इस बात को साबित होने में अभी भी वक्त है क्योंकि राहुल से लोगों ने उम्मीदें बहुत ज्यादा है।

मोहक मुस्कान के मालिक राहुल के बारे में लोगों का लगता है कि राहुल वो शक्स हैं जो भारत के एक नई सोच और दिशा दे सकते है। वो मनमोहन सिंह की तरह केवल फैसलों पर मुहर नहीं लगायेगें बल्कि वो अपना फैसला खुद लेने वाले व्यक्ति हैं । देखते हैं लोगों का ये भरोसा केवल भ्रम साबित होता है या फिर वाकई में हमें राजनीति की नई परिभाषा पढ़ने को मिलगी जिसे राहुल गांधी लिखेगें।

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