कांग्रेस में किताब से आया भूंकप, सोनिया नहीं इंदिरा बनी निशाना
जिसमें लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दुर्गति की शिकार खुद कांग्रेस की सुप्रीमो और भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हैं। किताब में ऐसी बातों का जिक्र है जिससे ये साबित होता है कि इंदिरा जी के तानाशाह रवैये के चलते यूपी में कांग्रेस की साख खराब होती चली गयी।
किताब के पन्नों पर साफ तौर पर लिखा है कि इंदिरा जी ने कोशिश तो एक आम आदमी से जुड़ने की थी लेकिन उनका ध्यान दिल्ली पर ज्यादा था जिसके चलते उन्होंने यूपी को अपने उन साथियों के हाथों सौंप दिया जिन्हें केवल सत्ता प्रिय थी ना कि जनता। जिसके चलते प्रदेश की हालत बद से बदतर हो गयी। इंदिरा जी के जिक्र पर पार्टी के आला नेता खामोश हैं, लेकिन करीबी सूत्रों के मुताबिक किताब में ये अंश किसने डाले हैं ये जानने को सब बेताब है।
क्योंकि मौजूदा कांग्रेस, कांग्रेस इंदिरा की देन है। असली कांग्रेस जो स्वतंत्रता संग्राम की सूचक थी उसका खात्मा तो बहुत पहले ही हो गया था। फिलहाल ये कोई पहला मौका नहीं है जब किताब को लेकर कांग्रेस में भूचाल आया है। पिछले साल स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो की किताब 'एल सारी रोसो यानी द रेड सारी' यानी लाल साड़ी ने तूफान मचा दिया था।
किताब के टाइटल में उस लाल साड़ी का जिक्र था जिसे पंडित नेहरू ने जेल में बुना था और सोनिया गांधी को उनकी शादी के दिन पहनने को दिया था। किताब में एक आम लड़की को खास बनने का जिक्र किया गया था। उसमें ये भी लिखा था कि सोनिया राजीव गांधी की मौत के बाद इटली वापस जाना चाहती थीं। इन्ही कुछ खास कारणों से इस किताब को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था।













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