सोनिया की लाल साड़ी ने उड़ाई कांग्रेस की नींद
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स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो की किताब 'एल सारी रोसो यानी द रेड सारी', सोनिया गांधी की जिंदगी पर लिखी गई नॉवेल है। यह 2008 में मार्केट में आयी थी। इटैलियन, फ्रेंच और डच में इसकी दो लाख से ज्यादा कॉपियां बिक चुकी हैं और अब इसका इंगलिश ट्रांसलेशन छपने को तैयार है। किताब के टाइटल में जिस लाल साड़ी का जिक्र है, उसे लेखक के मुताबिक पंडित नेहरू ने जेल में बुना था और सोनिया ने अपनी शादी के दिन पहना था। यह कहानी है, इटली के एक छोटे से गांव में पैदा हुई लड़की के हैरतअंगेज सफर की जिसे पावर तो मिली, लेकिन अपने पति को गंवाने के बाद। किताब में संजय गांधी को गालियां बकते और सोनिया को राजीव की मौत के बाद इटली चले जाने की सोचते दिखाया गया है। ऐसा कांग्रेस के पुरोधा कह रहे हैं।
ठीक है ये किताब ही तो है, तो इसमें इतना हाय तौबा मचाने की जरूरत क्या है? लेकिन नहीं, क्योंकि जिक्र इस किताब में उसका है जो हमारे देश में सत्ता चलाते हैं। यानी सोनिया गांधी का, जो देश की बहू हैं वो भी उस खानदान से हैं जिसका लहू हमेशा देश के लिए बहा है। हमेशा इस बात को आधार बना कर कांग्रेस अपना वोट बैंक मजबूत करती आयी है तो भला वो कैसे बर्दाश्त कर सकती है कि सोनिया के उस रूप को जनता के समक्ष लाया जाये जो कभी देश यानी भारत छोड़ना चाहता था वो भी अपने बच्चों समेत।
क्योंकि हमारे देश की जनता बेहद इमोशनल है, भावनाओं में आकर वो कुछ भी कर सकती है, बड़े ही खराब दौर से गुजरी कांग्रेस ने बड़ी मेहनत के बाद भारत की जज्बाती जनता के दिल में ये बात बिठायी है कि सोनिया उनकी बहू है चाहे वो विदेशी ही क्यों न हो? राहुल उसी बाप का बेटा है जो देश के लिए मर मिटा चाहे उसकी मां देश के बाहर की ही क्यों न हो । खैर अब किताब में असल में क्या लिखा है ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा।
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लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस किसी भी कीमत में अपने वोट बैंक को कमजोर नहीं होने देना चाहेगी, क्योंकि देश के बड़े राज्यों में विधान सभा चुनाव सिर पर है, ऐसे में ये किताब सोनिया की निगेटिव छवि को बढ़ावा दे सकती है, इसलिए फिलहाल मोरो की इस किताब का भारत में प्रकाशित होना मुश्किल लगता है।













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