कॉरपोरेट की शक्ल ले चुका है अंडरवर्ल्ड, डॉन बने सीईओ

इतना ही नहीं इन कंपनियों में काम करने वाले लोगों को बाकायदा हर महिने पगार दी जाती है। इन कंपनियों का अपना कम्युनिकेशन नेटवर्क होता है। कंपनी का लेखा जोखा रखने के लिये बकायदा चार्टर्ड एकाउंटेंट होते हैं। और तो और अगर इनके शागिर्द पकड़े गये तो कंपनी उन्हें छूडाने के लिये बाकायदा वकीलों की नियुक्ति भी करती है। उल्लेखनीय है कि अंडरवर्ल्ड की दुनिया में फिलहाल पांच बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें दाऊद इब्राहिम कासकर की डी कंपनी, छोटा राजन की आर कंपनी, एजाज लकड़ावाला और अली बुदेश की ए कंपनी, रवि पुजारी, बंटी पांडे और गुरु साटम की कंपनी और छोटा शकील के भाई अनवर शेख की केजीएन कंपनी।
यह सभी कंपनियां एक संगठित कॉरपोरेट कंपनियों की तरह काम कर रही हैं। जाहिर है इन सबमें सबसे बड़ी कंपनी नंबर वन है जिसका सालाना कारोबार खरबो में है। कंपनी का सीईओ है छोटा शकिल और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट मैनेजर है फहीम मचमच। मुंबई में इन दिनों डी कंपनी के लिए एक दर्जन से भी ज्यादा वकील काम कर रहे हैं। कंपनी के शूटरों का केस लड़ने से लेकर उनके डिपोर्टेशन तक की कार्यवाही पूरी करने का जिम्मा इन वकीलों का है। इन्हें कंपनी हर महीने पगार देती है। साथ ही कंपनी के काले धन को सफेद करने और हवाला के पैसे के रैकेट को संभालने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं।
कंपनी अपने कंट्री मैनेजरों से हवाला के पैसे का पूरा हिसाब-किताब लेती रहती है। पुलिस के आला अधिकारी भी मानते हैं कि अब अंडरवर्ल्ड की दुनिया एक लिमिटेड कंपनी की तरह हो चुकी है जहां हर चीज सलीके से की जा रही है।
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