शशि हत्याकांड ने ढहा दिया आनंद सेन का राजनीतिक किला

21 अक्टूबर 2007 को जब शशि के अपहरण व हत्या की घटना हुई तो उन दिनों मित्रसेन यादव सत्तादल के सांसद थे। उनके पुत्र आनंद सेन को भी राज्यमंत्री का रुतबा हासिल था। इससे पूर्व भी पिता-पुत्र सांसद-विधायक निर्वाचित होते रहे। इस हाई प्रोफाइल घटना में विधायक आनंद सेन का नाम आरोपियों में शामिल होने के बाद बसपा सरकार में मिली लालबत्ती भी छिन गई। करीब एक साल बाद वह गिरफ्तार कर जेल की सींखचों के पीछे भेज दिए गए।
शशिकांड मामले में सरकार व सेन परिवार की भद्द पिटने के कारण वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा ने सीटिंग एमपी होने के बावजूद मित्रसेन यादव का टिकट काट दिया। इससे खिन्न होकर उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। इस चुनाव में पहली बार ऐसा मौका आया जब मित्रसेन यादव को अपने ही गढ़ मिल्कीपुर विधानसभा में भी पराजय का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विसात बनाए रखने के लिये आंनद सेन की पत्नी इंदू सेन ने भी पंचायत चुनाव में किस्मत आजमाई मगर कोई फायदा नहीं हुआ और गहरी पैठ व तमाम समीकरणों के बावजूद लालबत्ती की पगबाधा दौड़ से सेन परिवार की दावेदारी खारिज हो गई।
शशि अपहरण व हत्याकांड: कब और कैसे क्या हुआ?
शशि प्रसाद व सीमा आजाद के साथ आनंदसेन के करीबी रिश्ते ने जिले की सियासत में एक काला अध्याय जोड़ दिया। साथ ही किसी रील लाइफ की तरह ही रीयल लाइफ की इस कहानी का भी दुखद अंत हुआ। तो आईए पूरे मामले पर शुरुआत से लेकर अंत तक एक नजर डालते हैं-
22 अक्टूबर 2007- साकेत महाविद्यालय, फैजाबाद की विधि की छात्रा शशि रहस्यमय परिस्थितियों में लापता
23 अक्टूबर 2007- पिता योगेन्द्र प्रसाद ने अयोध्या कोतवाली में दर्ज कराया गुमशुदगी का मुकदमा
30 अक्टूबर 2007- विजय सेन यादाव ने पूर्व के एक मामले में न्यायालय में किया आत्मसम्पर्ण
31 अक्टूबर 2007- विजय सेन यादव व सीमा आजाद को नामजद करते हुए अपहरण का मुकदमा दर्ज
5 नवम्बर 2007- सपा सुप्रिमो मुलायम सिंह यादव ने विधानसभा में आनंद सेन की संलिप्तता का मामला उठाया
7 नवम्बर 2007- आनंद सेन राज्यमंत्री पद से हटा दिये गये
22 दिसम्बर 2007- विजय सेन के नार्को टेस्ट के बाद पुलिस ने आंनद सेन को नामजद अभियुक्त बनाया
9 जून 2008- हत्याकांड की सह अभियुक्त सीमा आजाद गिरफ्तार
14 जून 2008- लखनऊ के गाजीपुर थाने में आंनद सेन ने किया आत्मसम्पर्ण
15 जून 2008- मंडल कारागार फैजाबाद भेजे गये
17 मई 2011- गिरफ्तारी के बाद लगातार जेल में निरुद्ध आंनद सेन व विजय सेन के अलावा जमानत पर रिहा सीमा आजाद को शशि की हत्या करने व शव गायब करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा
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