भट्टा परसौल में धरने पर बैठे राहुल गांधी

सुबह जिस समय राहुल यहां पहुंचे किसानों ने जहां आगे बढ़कर श्री गांधी का स्वागत कर आप बीती सुनायी वहीं महिलाएं उनके आगे रो पड़ी। श्री गांधी ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा तथा वे स्वयं मामले में प्रधानमंत्री से बात करेंगे।
रालोद प्रमुख अजित सिंह, राजनाथ सिंह, शिवपाल यादव व कलराज मिश्र कोई भी भटटा पारसौल गांव नहीं पहुंच सके। राजनैतिक गलियारों में शोर मचाकर किसानों से मिलने जा रहे तीनों नेताओं को स्थानीय प्रशासन ने रोक दिया। विरोध करने पर नेताओं को 144 के उल्लघंन के आरोप में हिरासत में ले लिया गया। इन सारी बातों को समझते हुए क्रांगेस के युवा नेता राहुल गांधी गुपचुप ढंग से भट्टा पारसौल पहुंच गए। श्री गांधी ने गांव से चार किलोमीटर दूरी पर अपना वाहन छोड़ पार्टी कार्यकार्ताओं के साथ राहुल ने मोटर साइकिल पर बैठकर गांव तक का सफर तय किया।
बगैर किसी सुरक्षा गार्ड के गांव पहुंचे राहुल को देखकर गांव वाली आश्चर्यचकित रह गए। किसानों ने राहुल को आपबीती सुनायी। किसानों ने बताया कि पुलिस ने उन पर कितने अत्याचार किया। किस प्रकार किसानों को घरों से बाहर निकाल-निकाल कर मारा गया। सवेरे साढ़े चार बजे राहुल के गांव पहुंचने की खबर प्रशासन को भी नहीं चल सकी। राहुल गांधी उस किसान राजपाल के घर भी गए जिसकी पुलिस फायरिंग के दौरान मौत हो गयी जबकि उन्होंने महिला वीरवती से भी मुलाकात की।
वीरवती ने रोते हुए बताया कि पुलिस के संघर्ष के बीच उसका बेटा चार दिनों से लापता है और अभी तक उसका कोई पता नहीं चला सका है। राहुल गांधी ने आवश्वासन दिया कि वे प्रधानमंत्री से मामले में बात करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है उनकी बातों को वे स्वयं केन्द्र सरकार तक पहुंचाएंगे ताकि उनको राहत मिल सके।
अब सवाल यह उठता है कि राजनाथ, शिवपाल की तरह क्या पुलिस राहुल गांधी को गिरफ्तार कर पायेगी। क्या मायावती की पुलिस में दम है कि सोनिया के युवराज को गिरफ्तार कर पाये। खैर आप क्या सोचते हैं इस प्रकरण पर? नीचे कमेंट बॉक्स में फेसबुक आईडी से लॉग-इन करके अपनी प्रतिक्रिया लिखें।












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