राम मंदिर मुद्दे को फिर भुनाने की फिराक में भाजपा

डा. जोशी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का आया आदेश स्वागत योग्य है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ विशेष पूर्ण पीठ के निर्णय पर रोक सम्बन्धी उच्चतम न्यायालय का आदेश सटीक और सारगर्भित है। उन्होंने कहा कि जब किसी पक्ष ने विवादित भूमि के विभाजन की मांग ही नहीं की थी तो उच्च न्यायालय ने उसे कैसे विभाजित कर दिया था। मामला अब उच्चतम न्यायालय में है। पूरा भरोसा है कि फैसला न्यायोचित आएगा। पूरा देश चाहता है कि रामलला विराजमान स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण हो।
हालांकि राममंदिर को मुद्दा बनाकर भाजपा काफी समय तक राजीनीति के शिखर पर रही। हिन्दू भावनाओं को भुना कर उसने न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश की राजीनीति में भी अपनी अहम भागीदारी करी। देश की सत्ता पर काबिज होने में यही मुद्दा प्रमुख रहा। गौरतलब है कि सत्ता हासिल करने के बाद भी भाजपा में मामले का निपटारा नहीं होने दिया शायद यही कारण रहा कि उसे कुछ समय बाद सत्ता से बाहर होना पड़ा।
बहरहाल अब इस मुद्दे में कोई दम रहा नहीं और राममंदिर मुद्दा कोर्ट के हवाले हो गया। ऐसे में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जहां अब नयी सोच लेकर भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने की कोशिश की है। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि भ्रष्टाचार को मुद्दा आम जनता को अधिक नहीं भाता क्योंकि भ्रष्टाचार के सभी राजनैतिक दलों में भरा पड़ा है। अन्ना हजारे द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होने के बाद सभी राजनीति पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ आग उगल रही है।वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता डा. जोशी को लगता है कि अभी भी वह रामंमंदिर के सहारे चुनावी जंग जीत लेंगें। यही सोचकर उन्होंनें प्रदेश में चुनावी सरगर्मी के दौरान ऐसी बयानबाजी की।












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