फांसी नहीं है ऑनर किलिंग से निपटने का रास्ता
इस सवाल का जवाब हमने पूछा इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के काउंसिलर एवं श्री जयनारायण पीजी कॉलेज के रीडर डा. आलोक चांटिया से। डा. चांटिया की मानें तो ऑनर किलिंग का सबसे बड़ा कारण वे लोग हैं, जो अपने बच्चों को देश की संस्कृति के बारे में नहीं बताते। ऑनर किलिंग के सबसे ज्यादा केस हरियाणा से आये हैं। सही मायने में देखा जाये तो यहां देश की अखंडता और हमारी संस्कृति एक दूसरे के विपरीत खड़ी हैं।
डा. अम्बेडकर ने कहा था कि देश में अखंडता लाने के लिए अंतर-जातीय विवाह सबसे अच्छा विकल्प है। आज यही अंतर-जातीय विकल्प हरियाणा के कई शहरों व गांवों में ऑनर किलिंग के कारण बन गये हैं। बात अगर संस्कृति की करें तो यहां एक गांव में, एक गोत्र में, अन्य जाति में विवाह करना पाप माना जाता है। पुरानी पीढ़ी आज भी उस संस्कृति को नहीं मानना चाहती, जिसमें दुर्गावती और हुमायुं भाई-बहन बन गये।
आलम यह है कि लोग अपने पड़ोस की लड़की को भी बहन मानने से परहेज़ करते हैं, जबकि एक दशक पहले तक लोग घर या पड़ोस की बात तो दूर पूरे गांव की लड़कियों को बहन मानते थे। उस वजह से बहन व बेटियां अपने गांव में तो सुरक्षित रहती ही थीं। यह एक बड़ा कारण है गांवों में बलात्कार की वारदातों के बढ़ने का। एक समय था जब गांव की लड़की की तरफ कोई नज़र भी उठा दे तो कत्लेआम हो जाता था, लेकिन आज गांव के ही नौजवान अपनी ही बहनों की इज्जत से खेल जाते हैं।
डा. चांटिया ने कहा, "मैं यह नहीं कहना चाहता कि ऑनर किलिंग करने वाले सही हैं और उसके भुक्तभोगी गलत। बात को सिर्फ समझने और समझाने की जरूरत है।" नई पीढ़ी काफी आगे बढ़ चुकी है। नई पीढ़ी संस्कृति और मान्यताओं के बंधन में नहीं रहना चाहती है। यही कारण है कि वो प्रेम-प्रसंग में ढूब जाते हैं, जो लोगों को बर्दाश्त नहीं होता और परिणाम में मिलती है मौत।
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अगर बीच का रास्ता निकाला जाये तो ऑनर किलिंग जैसी वारदातें देश से खत्म हो सकती हैं। डा. चांटिया का कहना है कि आज जरूरत है पुरानी पीढ़ी को अंतर-जातीय विवाह के अच्छे परिणामों के बारे में बताने की और युवा पीढ़ी को उनकी संस्कृति के बारे में बताने की। तभी बीच का रास्ता निकल सकता है। यह एक दो दिन का काम नहीं, इसमें भी कई दशक लग सकते हैं। यह जिम्मेदारी उठानी चाहिए समाजसेवियों, राजनेताओं, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया को।













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