ग्रेटर नोएडा में लगी हिंसा की आग कई जिलों में फैली

इस संघर्ष में सीओं सहित कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गये। बात यहीं समाप्त हो जाती तो फिर भी ठीक था मगर मथुरा में भी जमकर उपद्रव हुआ। अलीगढ़ में किसानों ने अपने नेता मनवीर सिंह तेवतिया पर 50 हजार का इनाम घोषित किए जाने को लेकर बवाल काटा तो गाजियाबाद के महरौली गांव में किसानों ने महापंचायत कर ऐलान किया कि वह पुलिस और प्रशासन को गांव की धरती पर पैर नहीं रखने देंगे। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार ने इन उपद्रवों का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ते हुए कहा है कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए किसानों को भड़का कर उपद्रव करा रहे हैं।
बिना तथ्यों को जाने ही वे इसे तूल दे रहे हैं। हालांकि भट्टा परसौल में शनिवार को हुए बवाल में घायल एक और व्यक्ति की मौत हो गई। एडीजी ब्रजलाल के दौरे के बीच पुलिस ने गांव में तलाशी अभियान चलाया। पुलिसिया खौफ के कारण सैंकड़ों लोग गांव से पलायन कर गए हैं। साथ ही हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए रालोद के मुखिया अजित सिंह, भाकियू नेता राकेत टिकैत समेत कई नेताओं को गांव पहुंचने से पहले ही रोक दिया। प्रशासन भट्टा परसौल में शांति स्थापित कर ही पाया था कि आगरा में बवाल शुरू हो गया। मालूम हो कि यमुना एक्सप्रेस वे टाउनशिप के लिए एत्मादपुर तहसील के छलेसर गांव में भू-अधिग्रहण की कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है।
दो दिन पूर्व कार्यदाई संस्था के कर्मियों द्वारा गढ़ी रामी में अधिग्रहीत भूमि पर बने मंदिर में तोड़फोड़ किए जाने पर कई गांवों के किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। शनिवार को ग्रेटर नोएडा में किसानों और पुलिस के साथ संघर्ष की जानकारी मिलने के बाद आक्रोशित किसानों ने कंपनी के कैम्प कार्यालय में तोड़फोड़ की और आधा दर्जन स्थानों मशीनों को फूंक दिया। एसडीएम और सीओ फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे, तो भीड़ ने पथराव के बीच पुलिसवालों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। ग्रेटर नोएडा, आगरा, अलीगढ़ में भूमि अधिग्रहण के विरोध को देखते हुए मुरादाबाद में प्रशासन ने विकास कार्यो के लिए जरूरी भू-अधिग्रहण प्रस्तावों पर फिलहाल कदम पीछे खींच लिए हैं। प्रशासन ने तय किया है कि किसानों की रजामंदी पर ही इस दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।












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