भट्टा परसौल प्रकरण जमीन अधिग्रहण नहीं कुछ और!

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के बयान पर भी प्रतिक्रिया दर्ज करायी और कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी को अपना मुंह खोलने से पहले सभी तथ्यों की जानकारी ले लेनी चाहिये। उन्होंने कहा विपक्षी दलों की बयानबाजी हकीकत से बहुत दूर है। विरोधी दलों के बयानों पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोधी पार्टियों की बयानबाजी निजी स्वार्थ, ओछी राजनीति से पे्ररित तथा दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्रिमंडलीय सचिव शशांक शेखर सिंह ने सरकार की सफाई पेश करते हुए कहा कि भट्टा परसौल का भूमि अधिग्रहण नियमानुसार तथा किसानों की सहमति से हुआ था।
उन्होंने बताया कि मार्च 2009 से अगस्त 2009 के बीच भट्टा गांव की 178 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस भूमि के एवज में किसानों को 120 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दिया गया। इसी प्रकार परसौल गांव की 260 हेक्टेयर भूमि किसानो से ली गयी जिसके बदले में उन्हें 180 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भू अधिग्रहण सम्बंधित कोई विवाद शेष नहीं है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की मूल समस्या व किसानों की मांग कुछ और है किसान वास्तव में भट्टा परसौल गांव आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन सुविधा की मांग कर रहे थे, जिसके तहत रोडवेज के कर्मचारी गांव सर्वे के लिए गये थे।
किसानों ने उन्हें किन्हीं कारणों से बंधक बना लिया। जब दो दिनों तक कर्मचारियों को छोड़ा नहीं गया तब प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। जब प्रशासन ने किसानों को कर्मचारियों को छोडऩे को कहा कि असमाजिक तत्वों द्वारा पुलिस के साथ हिंसा और गोलीबारी की गई। इस हिंसा में जिलाधिकारी समेत 38 पुलिस कर्मी घायल हुये। घटना में 22 लोग नामजद किए गये हैं जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना का एक आरोपी मनवीर सिंह तेवरिया फरार है। उन्होंने उपरोक्त व्यक्ति आपराधिक पृष्ठiभूमि का है तथा उस पर पचास हजार रुपये का ईनाम भी है। नामजद अन्य लोगों में नीरज मलिक, प्रेमवीर सिंह, गजे सिंह, किरन पाल व मनोज की गिरफ्तारी की कोशिश चल रही है। इन्हीं लोगों ने किसानों को हिंसा के लिए प्रेरित किया।












Click it and Unblock the Notifications