आखिर अब किस मुंह से पाकिस्तान जाते बराक ओबामा

ओबामा के रक्षा सलाहकार टॉम डॉनिलॉन ने कहा, 'ऐसे नाजुक मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा द्वारा पाकिस्तान के दौरे की बात ही नहीं उठती।' ये बात उन्होंने एनबीसी न्यूज चैनल से एक इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने कहाकि ओबामा के कार्यक्रम में पहले भी पाकिस्तान जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था और पिछले रविवार को हुई कार्रवाई (यानी ओसामा की मौत) के बाद इसमें भी कोई बदलाव नहीं आया है।
अमेरिका की कूटनीति
व्हाइट हाउस की ओर से जारी किए जा रहे इस तरह के कूटनीतिक बयानों से पता लगता है कि ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ये जताना चाहते हैं कि अमेरिका का पाकिस्तान से किसी तरह के कोई संबंध नहीं है। इसी देश में उन्होंने अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन को मार गिराया है।
अमेरिका-पाक, पहले पक्के दोस्त अब जानी दुश्मन क्यों
अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों की तरफ नजर डाले तो पता चलता है कि 80 और 90 के दशक में अमेरिका ही पाकिस्तान को हथियार मुहैया करवाता रहा है। पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों को पालने-पोसने में अमेरिका का सबसे बड़ा हाथ है। अफगानिस्तान युद्ध में रुस के खिलाफ अमेरिका ने अफगान लडा़कुओं के संगठन अलकायदा का साथ दिया। उन्हें हथियार और डॉलर दिए और वो ही आतंकवादी संगठन जब अमेरिका के दुश्मन बन गए तो अमेरिका ने हर तरह से उसका सिर कुचलने की ठान ली।
अमेरिका ने तबाह किया अफगानिस्तान
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका ने अफगानिस्तान को नेस्तानाबूत कर दिया। अमेरिकी सेना ने कभी ड्रोन तो कभी राकेट हमलों से इस देश की जनता का नरसंहार किया। जब अमेरिका के पाले-पोसे आतंकवादी संगठन ने उसपर ही 9/11 का हमला कर दिया तो अमेरिका ने अलकायदा के सरगना लादेन को अपना दुश्मन नंबर वन करार दे दिया।
वैसे अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों की हकीकत तो अब दुनिया की निगाहों से भी छुपी नहीं है। इसमें कोई शक नहीं कि बिन लादेन के पाकिस्तान में छुपे होने और वहीं अमेरिका द्वारा मार गिराए जाने के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हुए हैं लेकिन सवाल ये भी है कि क्या आतंक के खिलाफ इस लड़ाई में अमेरिका भारत का साथ देगा और अब पाकिस्तान से किस तरह से पेश आएगा अमेरिका।












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