'चीनी मिल नीलामी में माया का बड़ा घोटाला'
करोड़ों के इस घाटाले के सम्बंध में आरोपपत्र जारी करते हुए भाजपा सचिव किरीट सोमैया तथा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि चीनी निगम की मिलों के विक्रय में सरकारी मशीनरी का जमकर दुरपयोग किया गया। उपरोक्त आरोपपत्र पिछली सात अप्रैल को बसपा सरकार के खिलाफ लखनऊ में जारी एक सौ घोटालों में से एक है।
श्री सोमैया ने कहा कि चार साल के कार्यकाल में बसपा सरकार ने दो लाख 54 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि अमरोहा की चीनी मिल को सिर्फ 17.1 करोड़ रुपये में वेब्स लिमिटेड को बेंच दिया गया जबकि मिल में चीनी और शीरे के मौजूदा स्टाक की कीमत ही उस समय 13.64 करोड रुपये थी। इस हकीकत को देखकर कहा जा सकता है कि मिल की जमीन जो की 30.41 हेक्टेयर के करीब थी तथा अन्य उपकरणों की कीमत मात्र 3.37 करोड़ रुपये ही लगायी गयी।
आरोपपत्र में कहा गया कि चीनी मिल मुख्य अमरोहा शहर के 74 हेक्टेयर क्षेत्रफल मेंं स्थित है। मिल केभीतर ही परिसर में 4 बंगले, 6 कालोनी तथा 20 अन्य आवास हैं। उधर 84 एकड़ क्षेत्रफल में बनी बिजनौर चीनी मिल को पीबीएस फूड्स लिमिटेड को 101 करोड़ रुपये में बेचा गया। जबकि इसकी कीमत इससे कहीं अधिक कही जा रही थी। बहराइच के जरवल रोड स्थित चीनी मिल इण्डियन पोटाश लिमिटेड को 26.94 करोड़ रुपये में बेच दी गयी जबकि 94 एकड़ में फैली मिल में उस वक्त मौजूद चीनी और शीरा की कीमत 32.05 करोड़ रुपये थी।
उपरोक्त उदाहरण यह बताने के लिए काफी हैं कि सरकार ने किस प्रकार राज्य की सम्पत्ति को किस प्रकार कौडिय़ों के भाव कुछ खास व्यापारियों को बेच दिया। इस क्रम में बरेली, देवरिया, बाराबंकी और हरदोई की बंद चीनी मिलों को औने-पौने बेच दिया गया। भाजना नेताओं ने कहा कि पार्टी सरकार के खिलाफ संघर्ष करते हुए घोटालों का खुलासा करेगी। उन्होंने बताया कि यह तो पहला प्रकरण था तथा अभी कई और प्रकरण उजागर होगे जिसकी अगली कड़ी में नोएडा में हुए भूमि घोटाले के सम्बंध में आरोपपत्र जल्द ही जारी किया जायेगा। इस अवसर पर मौजूद श्री शाही ने कहा कि आरोपपत्रों को 12 जून को राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा।













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