भ्रष्टाचार के खिलाफ 4 जून से सत्याग्रह पर बाबा रामदेव

उल्लेखनीय है कि पिछले ही महीने गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आमरण अनशन किया था। माना जा रहा है कि बाबा रामदेव अपने नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में शामिल सिविल सोसाइटी के सदस्यों की अगुवाई करने के लिए ये कदम उठा रहे हैं। बाबा रामदेव का ये कदम राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है।
योग गुरु रामदेव इससे पहले भी जोर शोर से काले धन के मुद्दे को उठा चुके हैं। उनके एजेंडे में विदेशी बैंकों में जमा 400 करोड़ रुपए को भारत में वापस लाना शामिल है। अन्ना हजारे के साथी सिविल सोसाइटी के सदस्यों में बाबा की इस घोषणा से मिला जुला रुख है। लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग समिति में शामिल प्रशांत भूषण ने बाबा के इस कदम का स्वागत किया है।
बाबा रामदेव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर अपनी मांग भेज रहे हैं। बाबा का मुख्य एजेंडा है-
- कालाधन जमा कराने के दोषी पाए जाने पर देशद्रोह का मामला चलाया जाए और उसे सार्वजनिक संपति घोषित किया जाए।
- देश में ज्यादा मूल्य के करंसी नोट्स बंद किए जाएं क्योंकि इससे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
- जन लोकपाल बिल में भ्रष्टाचार के खिलाफ मृत्युदंड का प्रावधान हो।












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