सीरिया की निंदा पर यूएन में सहमति नहीं

रूस ने कहा है कि सीरिया में जो कुछ हो रहा है उससे दुनिया में शांति को ख़तरा नहीं है. चीन और भारत ने संकट का राजनीतिक और कूटनीतिक हल निकालने की बात कही है लेकिन हिंसा की निंदा नहीं की. आरोप लगाए जा रहे हैं कि करीब छह हफ़्ते पहले सीरिया में शुरु हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में कथित तौर पर 450 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
रूस के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है, “अगर सीरिया के घरेलू हालात में हस्तक्षेप किया गया तो क्षेत्रीय सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लीबिया को छोड दिया जाए तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अरब जगत में चल रहे आंदोलनों पर कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है.
रूस का रुख़
लीबिया में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को लेकर रूस में असहजता बढ़ रही है और उसका मानना है कि लीबिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के दायरों से बाहर जाकर क़दम उठा रहा है. संवाददाता के मुताबिक इस वजह से सीरिया पर रूस ने कड़ा रुख़ अपना लिया है.लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत ने कहा है कि सीरिया में सरकार हिंसा बंद करे.
अमरीका और यूरोपीय संघ ने आगाह किया है कि अगर सीरिया में सुधार लागू नहीं किए गए तो वे सीरिया पर और प्रतिबंध लगा सकते हैं. सीरिया में राष्ट्रपति असद की सरकार इन बातों की खंडन कर रही है कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा नहीं की है. शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की एक आपात बैठक हो रही है. इसमें उस मसौदे पर विचार होगा जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति असद आंदोलनकारियों की चुनौती ख़त्म करने की कोशिश बंद करें.












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