अब सैटेलाइट बताएगी कौन सी जमीन किसकी

सिरसा। भविष्‍य में अगर जमीन को लेकर कोई विवाद हुआ और प्रशासन के पास रखे कागज़ात नहीं मिले, तब भी जमीन पर अवैध कब्‍जा नहीं हो सकेगा। जी हां तब सेटेलाइट बताएगी कि जमीन किसकी है। यह परियोजना जल्‍द शुरू हुई है हरियाणा के सिरसा जिले में। प्रदेश के पूरे भू-राजस्व रिकार्ड को राष्टीय लैंड रिकार्ड आधुनिकरण कार्यक्रम के तहत सैटेलाइट से जोड़ा जाएगा। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित इस कार्यक्रम की शुरूआत आज पायलट प्रौजेक्ट के रुप में सिरसा से की गई।

उपायुक्त डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने स्थानीय डी आर डी ए कॉपलैक्स में युनिक आई डी चिप मोनोमैंट जमीन के अन्दर दबाकर इसकी शुरुआत की। देश भर में सबसे पहले यह कार्यक्रम सिरसा जिला से शुरु किया गया है, क्योंकि भारत वर्ष में सिरसा ऐसा पहला जिला है जिसका पूरा राजस्व रिकार्ड कम्पूयटरीकृत करके वैब साईट पर डाला जा चुका है।

इस सम्बंध में विस्तृत जानकारी देते हूए उपायुक्त डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने बताया की जिला में इस कार्यक्रम की शुरुआत हरियाणा स्पेस एपलिकेशन सैंटर (हरसैक) के माध्यम से की गई है।

उन्होने बताया कि जिला में यह सिस्टम स्थापित होने से जिला की पूरी भूमि की स्थिति का एक जगह बैठकर कम्प्यूटर स्क्रीन व एलसीडी के माध्यम से पता लगाया जा सकेगा इस सिस्टम का मुख्य सर्वर जिला मुख्यालय के साथ-2 राज्य मुख्यालय चण्डीगढ़ में स्थापित होगा जहां से सम्बन्धित विभाग के अधिकारी ताजा स्थिति का पता लगा पाएगें । सैटेलाइट के माध्यम से विभिन्न फसलों की गिरदावरी करने के साथ साथ गिरदावरी की पड़ताल भी की जा सकेगी । इतना ही नही प्रकृति प्रकोप से फसलो में होने वाले नुकसान की स्थिति का जायजा भी सैटेलाइट के माध्यम से कम्पयूटर के जरिए लिया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि इस सिस्टम की स्थापना के लिए जिला में शुरूआती दौर में 13 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां युनिक आई डी चिप मोनोमैंट स्थापित की जानी है। इस चिप के माध्यम से ही आसपास के क्षेत्र की भूमि की स्थिति को सैटेलाईट तक पहुंचाया जा सकेगा जिससे ताजा स्थिति भी अपडेट होती रहेगी। यह आई डी चिप जिला एवं खण्ड स्तर के साथ-साथ बड़े-बड़े गांवों में स्थापित की जाएगी। ये आई डी चिप लगभग 25 किलोमीटर परिधि के क्षेत्र को कवर करेगी। इसके पश्चात पूरे जिला में 10-10 किलोमीटर की दूरी पर 50 युनिक आई डी मौनोमैंट स्थापित होंगी जो पूरे जिला को कवर करेंगी। यह कार्य आने वाले डेढ माह तक पूरा कर लिया जाएगा इसके लिए राजस्व विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सम्बन्धित क्षेत्रों की भूमि का कम्प्यूटीरकृत रिकार्ड हरसैक के कार्यक्रम में फीड करवाएं।

इस कार्यक्रम के राज्य संयोजक डा. सुलतान सिंह ने बताया कि देश में इस कार्यक्रम की स्थापना के लिए निजि क्षेत्र की कम्पनियों का सहयोग भी लिया जा रहा है। सिरसा जिला में रोमटैक नामक कम्पनी के सहयोग से इस सिस्टम की स्थापना की जा रही है। उन्होंने बताया कि सिरसा जिला में सफलता पूर्वक संचालन के पश्चात यह कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में शुरू किया जाएगा। इस सिस्टम की स्थापना के लिए पूरे प्रदेश में 121 स्थानों का चयन कर लिया गया है।

सिरसा जिला में जिला मुख्यालय के पश्चात तहसील, खण्ड एवं गावं स्तर के क्षेत्र को कवर किया जाना है। उन्होंने इस कार्यक्रम की तुलना स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में हुई किलाबंदी के कार्यक्रम से हुई जिस प्रकार से किलाबंदी के बाद देश में हरित क्रान्ति को सफलता मिली उसी प्रकार से आधुनिक रूप से लैंड रिकार्ड को सैटेलाईट से जोडऩे पर एक नई हरित क्रान्ति की शुरू आत होगी और देश और प्रदेश के राजस्व में बढ़ौतरी होगी।

उन्होंने दावा किया कि पूरे देश में यह सिस्टम लागू होने से राष्टीय कृषि विकास दर में लगभग तीन प्रतिशत का इजाफा होगा क्योंकि देश के किसी भी भाग में प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के प्रबन्धन के लिए राजकीय स्तर पर तुरन्त कार्यवाही की जा सकेगी जिससे आमजन को सुविधा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभ होगा। गौरतलब है कि सिरसा जिला का पूरा भू-राजस्व रिकार्ड कम्प्यूटरीकृत हो चुका है और कोई भी व्यक्ति सम्बन्धित दस्तावेज वैबसाईट से डाउनलोड कर सकता है।

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