आखिर कब तक जारी रहेगी रेलवे ट्रैक पर दबंगों की दरिंदगी!

Sonu Sinha
लखनऊ। बॉस्‍केट बॉल के जरिये चोटी की खिलाड़ी बन देश और मां बाप के सपने पूरा करने का ख्‍वाब देख रही अरुणिमा उर्फ सोनू सिन्‍हा अब शायद हमेशा खौफनाक सपनों के सहारे जिंदा रहेगी। देश की इस होनहार खिलाड़ी को दो दिन पूर्व दरिंदों ने चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया था। अब सवाल यह पैदा होता है कि सोनू का जुर्म क्‍या था और सोनू को किसने नीचे फेंका? शायद इस बात का जबाब रेलवे प्रशासन और राज्‍य सरकार के पास भी नहीं है। इन दोनों सवालों का जबाब जो आम आदमी के दिमाग में चल रहा है वह आईए हम आपको बताते हैं। सोनू का जुर्म था कि वह एक महिला है, और उसे जिन लोगों ने नीचें फेंका वह ऐसे लोग हैं जो सुरक्षा व्‍यवस्‍था और कानून को अपने जेब में लेकर घूमते हैं। उन्‍हें इस बात का इल्‍म होता है कि पुलिस या जीआरपी इस मामले में कुछ भी नहीं कर पाएगी।

इस क्रम में आगे बढ़ने से पहले आईए घटना क्रम पर नजर डालते हैं। नोएडा में खेल कोटे से सीआईएसएफ में नौकरी की खातिर इंटरव्यू देने के लिए सोनू लखनऊ से दिल्ली आ रही थीं। पद्मावत एक्सप्रेस में चनहेटी और बरेली रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रेन में सवार तीन लुटेरे यात्रियों से लूटपाट कर रहे थे। इसी दौरान लुटेरों ने सोनू की सोने की चेन खींचने की कोशिश की और विरोध करने पर उसे चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। दूसरी ओर से आ रही एक अन्य ट्रेन से उसकी बायीं टांग कट गई। सोनू को मुआवजा और रेलवे में नौकरी देने की घोषणा की गई है। जीआरपी ने लुटेरों के बारे में पता देने वालों को 15 हजार रुपये देने की भी घोषणा किया है। मगर क्‍या इससे पहले इस तरह के हुए हादसों में जीआरपी किसी आरोपी को भी गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर पायी है।

राजकीय रेलवे पुलिस मुख्यालय में दर्ज आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2009 में 293 लोगों की चलती ट्रेन से गिरकर मौत हुई है। वर्ष 2010 में यह संख्या 213 थी। इनमें से कई यात्रियों की मौत ट्रेन से फेंकने और धक्का दिये जाने से हुई है। सोनू सिन्‍हा को चलती ट्रेन से फेंकने की यह वारदात यूपी में पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी 26 जनवरी 2004 को मथुरा-कोसीकलां के बीच छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में एक हादसा हुआ। ट्रेन की जनरल बोगी में महिलाओं से छेड़खानी का विरोध करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे मनीष मिश्र को शरारतीतत्वों ने चलती ट्रेन से धक्का दे दिया। मौके पर ही मनीष की मौत हो गई। इतना हाई प्रोफाइल मामला होने के बावजूद जीआरपी आज तक मनीष मिश्र के हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी। इसके अलावा जो वारदातें हुई वह निम्‍न प्रकार से हैं

12 अक्‍टूबर 2008- लखनऊ के दिलकुशा गार्डेन के पास आम्रपाली से नवदम्‍पत्ति को फेंका, मौत
13 नवम्‍बर 2008- उन्‍नाव के पास महिला को तेज रफ्तार ट्रेन से नीचे फेंका, मौत
14 अप्रैल 2009- बाराबंकी के पास कुशीनगर एक्‍सप्रेस से युवक को फेंका
05 जून 2009- हरदोई में पुलिस इंस्‍पेक्‍टर ने मामूली से बात पर अपनी पत्‍नी को ट्रेन से नीचे फेंका, मौत
18 जून 2009- लखीमपुरखीरी में गर्भवती महिला को जीआरपी के जवानों ने चलती ट्रेन से फेंका, मौत
19 जुलाई 2009- लखनऊ आ रही वृद्ध महिला को सीतापुर के पास चलती ट्रेन से फेंका, मौत
26 जुलाई 2009- बाराबंकी के पास जननायक एक्‍सप्रेस से युवक को धक्‍का दिया
01 जनवरी 2010- इलाहाबाद, रामनगर में जीआरपी के जवान को फेंका
03 फरवरी 2011- मेमू में बैठने के दौरान हुए विवाद को लेकर अमौसी स्‍टेशन के पास युवक को चलती ट्रेन से फेंका
03 मार्च 2011- लखनऊ आ रहे युवक को गाजियाबाद में गोमती एक्‍सप्रेस से लूट के बाद चलती ट्रेन से फेंका

इस बारे में आपकी क्‍या राय है, अपने विचार नीचे लिखे कंमेंट बाक्‍स में जरुर दर्ज कराएं। हमें इंतजार रहेगा।

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