भाजपा ने की उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बढ़ती अपराध दर ही अगले विधानसभा चुनाव में मायावती सरकार की हार का कारण बनेगी। श्री शाही ने कहा है कि उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के खिलाफ सौ घोटालों की जो 'एफआईआर' कल जारी की है, उसके दबाव में ही दो कैबिनेट मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि शाही ने यह भी कहा कि सिर्फ इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है वरन उनके खिलाफ भष्टाचार के मामलों तथा लखनऊ के सीएमओ (परिवार कल्याण) विनोद कुमार आर्या और फिर डा. वी पी सिंह की हत्या की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जनता का ध्यान बंटाने के लिए मुख्यमंत्री मायावती ने अपने मंत्रियों से इस्तीफा दिलवाया है, जबकि भ्रष्टाचार के आरोपों एवं उनके प्रति जवाबदेही से मुख्यमंत्री खुद नहीं बच सकती। श्री शाही ने कहा कि भाजपा अब बड़े घोटालों पर हर दस दिन बाद दस्तावेजी रिपोर्ट जारी करेगी। इसकी शुरूआत सरकारी चीनी मिलों की बिक्री में हुए हजारों करोड़ रुपए के घोटालों की रिपोर्ट से होगी।
इसी कड़ी में पार्टी 12 जून को राष्ट्रपति को उत्तर प्रदेश में व्याप्त घोटालों से संबंधित चार्जशीट मय सबूत सौंपेगी। शाही ने कहा कि भष्टाचार के खिलाफ भाजपा पहले से ही संघर्ष करती रही है और उसका मानना है कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री को भी लाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जन लोकपाल विधेयक को लेकर जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे के आंदोलन का भाजपा समर्थन करती है।













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