बाघों की संख्या के साथ बढ़ी भारत की गरिमा

अब अगर बाघों की संख्या में इज़ाफा हुआ है तो यह अच्छे संकेत हैं। सच पूछिए तो वर्तमान में मौजूद 1706 बाघ देश की गरिमा हैं। 1 अरब से ज्यादा आबादी वाला देश में अगर 1700 बाघों को नहीं बचा पाया तो काफी शर्म की बात होगी।
देश में छह कंजरवेशन फॉरेस्ट हैं, जहां बाघों का संरक्षण किया जाता है। इनमें शिवालिक-तेराई, नॉर्थ-ईस्ट, सुंदरबन, सेंट्रल इंडियन, ईस्टर्न घाट और वेस्टर्न घाट के जंगल शामिल हैं।
जरा सोचिए 19वीं शताब्दी में देश में 45000 बाघ थे। सोमवार को पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक आज इनकी संख्या मात्र 1700 है। इस लिहाज से बाघों को बचाना हमारी और आपकी जिम्मेदारी है। आप सोच रहे होंगे कि एक आम आदमी होते हुए आखिर बाघों को बचाने में हम क्या कर सकते हैं।
आप कई तरह से प्रोजेक्ट टाइगर में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करा सकते हैं। सरकार हर साल करोड़ों रुपए इस प्रोजेक्ट पर खर्च करती है। आप भी इसमें अपना योगदान दे सकते हैं। आप अपनी आय का थोड़ा सा हिस्सा सरकारी खाते में जमा करा सकते हैं। इसके लिए आप वन विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। यदि आप ऐसे लोगों के बारे में जानते हैं, जो चोरी छिपे बाघों का शिकार करते हैं, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
यदि आप ऐसे लोगों के बारे में जानते हैं, जो जंगलों को नष्ट कर रहे हैं, तो वन विभाग को सूचित कर सकते हैं। क्योंकि बाघों की संख्या के कम होने के पीछे जंगलों की कटाई काफी बड़ा फैक्टर था।
आप आने वाली जैनरेशन यानी अपने बच्चों को बाघों के संरक्षण की जरूरत को समझा सकते हैं। यदि आप कहीं बाघों के खिलाफ अपराध होते देखते हैं, तो उसे आप सीधे वेबसाइट से रिपोर्ट कर सकते हैं। उसके लिए आपको प्रोजेक्ट टाइगर की वेबसाइट पर जाकर जरूरी जानकारियां देनी होंगी। अंत में यदि आप पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायेंगे, तो कहीं न कहीं उसका सकारात्मक असर जंगलों पर भी पड़ेगा और हमारे बाघ बचे रहेंगे।












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