पश्चिमी यूपी और पूरे हरियाणा में ट्रेनें रोकेंगे जाट
हवा सिंह मान ने बुधवार की सुबह सरकार को चेतावनी दी कि यदि आज शाम चार बजे तक आरक्षण को लेकर कोई आश्वासन नहीं मिला, तो संपूर्ण जाट समुदाय पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हर जगह रेल मार्ग जाम कर देगा। इसके लिए लाखों की संख्या में जाट तैयार बैठे हैं। सांगवान ने केंद्र सरकार के उस पत्र का भी खुलकर जवाब दिया, जिसमें ट्रेने रोके जाने से होने वाली हानि की भरपाई करने को कहा गया था। सांगवान ने कहा कि जाट पहले ही पैसे की तंगी से जूझ रहे हैं, वो यह भरपाई नहीं कर सकते।
आंदोलन की ताज़ा स्थिति यह है कि हरियाणा में भिवानी के पास गोरखधाम एक्सप्रेस और भटिंडा से आ रही किसान एक्सप्रेस को जाटों ने रोक रखा है। जाटों ने फिलहाल हिसार से दिल्ली और पंजाब जाने वाले मार्गों पर ट्रेनें रोकी हैं। लेकिन अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे हरियाणा से एक भी ट्रेन गुजरने नहीं देंगे।
उधर उत्तर प्रदेश के अमरोहा में व्यस्ततम दिल्ली-लखनऊ रेल मार्ग अभी भी जाम कर रखा है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले आन्दोलनकारी रेल पटरियों पर डेरा जमाये हुए हैं। समिति की राज्य सरकार से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आज केन्द्र सरकार से बात होने की सभावना बढ़ी है। इसी सिलसिले में संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली रवाना हो गया है। करीब तीन हजार जाटो ने काफूरपुर रेलवे स्टेशन के पास रेल मार्ग पर खाट
डालकर डेरा जमाए हुये हैं। कई गाडिय़ों के मार्ग परिवर्तित कर दिये गये हैं जबकि कुछ निरस्त कर दी गयी हैं। गजरौला के पास डेरा जमाये ये आंदोलनकारी रेल पटरियों पर ही खाना बना रहे हैं। रात्रि में वहीं आग जलाकर तापते हैं। वहीं सो भी रहे हैं। आंदोलनकारियों ने करीब दस स्थानों पर रेल मार्ग बाधित किया है।
उत्तर प्रदेश इकाई ने भी दी चेतावनी
संघर्ष समिति के संयोजक यशपाल मलिक ने कहा कि मांग पूरी होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। वहां केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत होगी।
जाट आरक्षण समिति ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों को दरकिनार किये जाने पर आंदोलन और तेज किया जायेगा लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी भी तरह हिंसक नहीं होने दिया जायेगा। उनकी मांगे जायज हैं और वे लोकतांत्रिक ढंग से इसे पूरा किये जाने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर रेलवे प्रशासन ने रेल मार्ग सामान्य नहीं कराने के लिए राज्य सरकार को कोसते हुए कहा है कि राज्य सरकार इस रेल मार्ग को सामान्य कराने में कोई सहयोग नहीं दे रही है। इसीलिए देश के अतिमहत्वपूर्ण रेल मार्गो में से एक दिल्ली-लखनऊ रेल मार्ग सामान्य नहीं हो पा रहा है। उत्तर रेलवे के महाप्रबन्धक ने राज्य के मुय सचिव को दो पत्र भेजे हैं। सूत्रों के मुताबिक महाप्रबन्धक ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि ऐसा लगता है कि विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार कोई कड़ा कदम उठाना नहीं चाहती हालांकि लिखे पत्र में इस विषय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।













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