गोधरा कांड में 11 को फांसी, 20 को उम्रकैद

9 साल बाद आये विशेष अदालत के फैसले में जिन लोगों के खिलफ फांसी की सज़ा सुनाई गई है, उनमें- इस्माइल सुलेजा, हाजी बिलाल, सिराज बाला, शेख कलंदर, हसन लालू, महबूब चांडा, इरफान पातडि़या, रज्जाक, सलीम जर्दा, बेहरा हुसैन और सलमान को फांसी की सजा सुनाई।
कोर्ट ने रज्जाक कुर्कुर को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए फांसी की सज़ा दी गई।
इन लोगों को फांसी इसलिए सुनाई गई है क्योंकि इनमें से आधे लोगों ने एक रात पहले अमन गेस्ट हाउस में साजिश बनाई गई और 140 लीटर पेट्रोल जमा किया था और पूरी साजिश के साथ इस कांड को अंजाम दिया।
अमन गेस्ट हाउस के मालिक रज्जाक कुर्कुर को भी दोषी करार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई गई। इसी गेस्ट हाउस में 26 फरवरी की रात भर बैठकें चलीं और फिर टेम्पो पर लाद कर पेट्रोल स्टेशन तक यहीं से ले जाया गया। अमन गेस्ट हाउस स्टेशन से मात्र 600 मीटर की दूरी पर है।
बेहरा ने पेट्रोल के डिब्बे पहुंचाये, बेहरा, कुरकुर दोनों कश्मीर से ट्रेनिंग लेकर बम बनाने, सिराज मोहम्मद, बाला और अब्दुल बेहरा रिक्शे से पेट्रोल लेकर प्लेटफॉर्म पहुंचे थे। कलंदर ने चेन पुलिंग करके ट्रेन को रोकने व ट्रेन में पेट्रोल डालने में उसकी भूमिका थी। महबूब अहमद यूसुफ हसन ने एस-6 और एस-7 के बीच चमड़े के कनेक्शन को चीर दिया था।
ऐसे तमाम तथ्यों के साथ स्पेशल कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए फांसी की सज़ा सुनाई गई है।
गौरतलब है कि 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के एक डब्बे में लगाई गई आग में 59 लोग जिनमें ज़्यादातर अयोध्या से लौट रहे हिंदू कारसेवक थे, वो मारे गए थे। हस कांड के बाद गुजरात में दंगे भड़क गये थे।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 डब्बे पर लगभग एक हजार लोगों की भीड़ ने हमला किया था। इस घटना के बाद गुजरात में भारी सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इस जांच पर सवाल उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में आर के राघवन के नेतृत्व में एक और जांच दल गठित करने का आदेश दिया था।












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