प्रसन्न बच्चे ही बड़े होने पर रहते हैं खुश
लंदन, 27 फरवरी (आईएएनएस)। कम उम्र में खुश और हर्षित रहने वाला इंसान ही प्रौढ़ावस्था में बेहतर कार्य कर सकता है और संतुष्ट रह सकता है। नए अनुसंधान में यह बात सामने आई है।
बाल्यावस्था में परेशान रहने वाले व्यक्ति को मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसलिए यह जानने का प्रयास किया गया कि इंसान पर सकारात्मक बचपन का कैसा प्रभाव पड़ता है।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और एमआरसी यूनिट ने 1946 में ब्रिटेन में जन्मे 2,776 लोगों के ताउम्र स्वस्थ रहने और उनकी कार्यक्षमता पर बढ़ती उम्र का असर न पड़ने की वजह जानने का प्रयास किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सकारात्मक बचपन और बाद के बेहतर जीवन के बीच गहरा ताल्लुक है।
सकारात्मक मनोविज्ञान की एक पत्रिका के मुताबिक सकारात्मक बचपन किसी छात्र की खुशी, दोस्ती और 13 व 15 की उम्र में शारीरिक ऊर्जा के स्तर पर निर्भर करता है।
कैम्ब्रिज की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक एक छात्र को इन चार दशाओं में से प्रत्येक के लिए सकारात्मक अंक दिए गए- बच्चा अन्य बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय रहा हो, असाधारण रूप से प्रसन्न और संतुष्ट हो, बहुत आसानी से किसी को दोस्त बना लेता हो और काफी ऊर्जावान, कभी थकने वाला नहीं हो।
प्रसन्न बच्चों में अन्य की तुलना में जीवनभर मानसिक असंतुलन की आशंका भी काफी कम रहती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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