भारतीयों की मदद के लिए कुवैत दूतावास की योजना
कुवैत सिटी, 27 फरवरी (आईएएनएस)। कुवैत में भारतीय दूतावास ने यहां काम करने वाले भारतीयों की समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष मॉडल तैयार किया है, जो खासतौर पर महिला कामगारों के लिए बेहद अहम है। दूसरे देशों में कामगारों की मदद के लिए भारतीय दूतावासों की भूमिका के संदर्भ में भी यह योजना कारगर साबित हो सकती है।
कुवैत में भारत के राजदूत अजय मल्होत्रा के अनुसार यहां भारतीय कामगारों का एक बड़ा समुदाय है, जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अहम उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उनकी चिंता इन कामगारों के हितों की सुरक्षा करना है। अप्रैल, 2009 से ही दूतावास यहां कामकाज के मोर्चे पर समस्याओं का सामना करने वाले भारतीय घरेलू नौकर, नौकरानियों, खाना पकाने वाले और चालकों को रहने के लिए जगह मुहैया करा रहा है। दूतावास उनकी शिकायतें भी सुनता है और उनके समाधान की कोशिश करता है।
महल्होत्रा ने बताया कि प्रभावितों को नए कपड़े, बिस्तर, शौचालय सुविधा आदि उपलब्ध कराई जाती है। वे टीवी देख सकते हैं और संगीत भी सुन सकते हैं। उन्हें कुवत से भारत के नजदीकी हवाई अड्डे तक का टिकट भी दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपातकालीन खर्च के लिए 3,000 रुपये और नए कपड़ों के साथ एक सूटकेस भी दिया जाता है। इसका मकसद केवल इतना है कि वे पूरे सम्मान के साथ भारत लौट सकें।
राजदूत के अनुसार उनकी योजना के तहत आश्रय पाने वालों में अधिकतर महिलाएं होती हैं। वे औसतन 4-5 सप्ताह तक यहां रुकती हैं। इस वक्त 50 औरतें और 2 पुरुष दूतावास के आश्रयघर में हैं। वर्ष 2010 में यहां 585 घरेलू मजदूरों को आश्रय मिला। दूतावास के कर्मचारी कुवैत की जेलों में बंद भारतीयों से मिलने भी जाते हैं और उन्हें हरसंभव सहायता मुहैया कराते हैं।
दूतावास ने इसके लिए एक कॉल सेंटर तैयार है, जहां प्रभावित लोग हिंदी, मलयालम, तमिल, तेलुगू, अरबी और अंग्रेजी में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मल्होत्रा के अनुसार कुवैत की तर्ज पर भारत अन्य देशों के दूतावास में भी ऐसी व्यवस्था करना चाहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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