कभी रंगीन हुआ करती थीं बामियान की बुद्ध प्रतिमाएं
इसका खुलासा जर्मनी में टेक्निक यूनीवर्सिटेट म्यूनचेन (टीयूएम) के रेस्टोरेशन, आर्ट टेक्नोलॉजी एंड कंजरवेशन साइंस के विद्वानों ने किया है। टीम के प्रमुख इर्विन इमर्लिग ने कहा कि एक समय में बुद्ध प्रतिमाएं बेहद रंगीन थीं।
छठी शताब्दी ईसा पूर्व की दो विशालकाय बुद्ध प्रतिमाओं को तालिबानियों ने 10 साल पहले नष्ट कर दिया था।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, प्रतिमाओं का बाहरी आवरण गहरे नीले रंग से रंगा गया था, जबकि अंदर से इन्हें गुलाबी रंग से रंगा गया था। बाद में शीर्ष पर इसे नारंगी रंग से रंग दिया गया। फिर बड़ी बुद्ध प्रतिमाओं को लाल रंग और छोटी प्रतिमाओं को सफेद रंग से रंगा गया, जबकि इनके अंदरूनी हिस्सों को नीले रंग से रंगा गया।
टीयूएम के शोध के अनुसार 11वीं शताब्दी की बुद्ध प्रतिमाओं का रंग लाल और चांदनी रंग सा सफेद था। इन प्रतिमाओं को चट्टान काटकर बनया गया था, जबकि प्रतिमाओं का बाहरी आवरण चिकनी मिट्टी से बनाया गया था। प्रतिमाओं का बाहरी आवरण बनाने के लिए शिल्पकारों ने चिकनी मिट्टी के दो और तीन परत का इस्तेमाल किया। ये आकृतियां अब भी शिल्पकला का बेहतरीन नमूना हैं।
इमर्लिग के अनुसार प्रतिमाओं के सतह बेहद चिकने पए गए हैं। संभवत: इन्हें चीनी मिट्टी से बनाया गया था। कई हिस्सों से टूटने के बावजूद ये प्रतिमाएं पिछले करीब 1,500 वर्ष से बची रहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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