रेल बजट : 'चुनावी पटरी' पर सरपट दौड़ी 'ममता एक्सप्रेस' (राउंडअप)

पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य को लोगों को अपनी तरफ से देने के लिए उनके पास अंतिम मौका था। अलबत्ता 'चुनावी पटरी' पर सपरट दौड़ने में 'ममता एक्सप्रेस' ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

रेल बजट पेश करते हुए ममता ने रेल आधारभूत संरचना क्षेत्र में 57,630 करोड़ रुपये के निवेश और 68 नई रेलगाड़ियां चलाने के साथ कई 'लुभावने' प्रस्ताव पेश किए।

लोक-लुभावन घोषणाएं:-

रेल किराए में कोई वृद्धि नहीं करने के साथ ममता ने शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को रियायत सुविधा राजधानी और शताब्दी रेलगाड़ियों में भी देने का प्रस्ताव किया। कीर्ति और शौर्य चक्र से सम्मानित लोगों को राजधानी और शताब्दी रेलगाड़ियों में यात्रा करने के लिए भी रियायत सुविधा देने की उन्होंने घोषणा की। मरनोपरांत परमवीर चक्र तथा अशोक चक्र वीरता पदक से सम्मानित अविवाहित व्यक्ति के माता पिता को कार्ड पास सुविधा देने का भी ममता ने प्रस्ताव किया।

इसके अलावा उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली 30 प्रतिशत रियायत को बढ़ाकर 40 प्रतिशत और महिलाओं की 58 वर्ष की आयु में ही वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायत की घोषणा की। मीडियाकर्मियों और उनके परिवार को साल में दो बार की यात्रा के लिए किराये में 50 फीसदी की छूट की घोष्णा भी की गई।

ममता ने नौ नई दूरंतो, तीन नई शताब्दी एक्सप्रेस, स्वामी विवेकानंद की स्मृति में चार विवेक एक्सप्रेस, गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर चार कवि गुरु एक्सप्रेस, 10 राज्यरानी एक्सप्रेस और जन्मभूमि गौरव के नाम से विशेष पर्यटक रेलगाड़ी चलाने की भी घोषणा की।

नई रेलगाड़ियों के अलावा बजट में 33 रेलगाड़ियों की दूरियां बढ़ाने और 17 अन्य के फेरों में वृद्धि करने की घोषणा की गई। उन्होंने 107 नए मार्गो का सर्वेक्षण कराने, जयपुर-दिल्ली और अहमदाबाद-मुम्बई मार्ग पर डबल डेकर रेलगाड़ियां चलाने और उन्नत वातानुकूलित श्रेणी शुरू करने का प्रस्ताव भी किया।

इसके अलावा एक बहुउद्देशीय अखिल भारतीय स्मार्टकार्ड 'गो इंडिया' शुरू करने की घोषणा की गई जो लम्बी दूरी, उपनगरीय और मेट्रो रेलगाड़ियों में टिकट के बदले प्रयोग होंगे। साथ ही इंटरनेट के माध्यम से टिकट खरीदने पर वातानुकूलित श्रेणी के लिए 10 रुपये और अन्य श्रेणियों के लिए पांच रुपये शुल्क लिया जाएगा।

इस सबके अलावा बनर्जी ने अपने राज्य पश्चिम बंगाल के सिंगूर में एक नया रेल डिब्बा कारखाना, 15 नई उपनगरीय रेलगाड़ियां और कोलकाता मेट्रो सेवा के लिए 34 नई रेलगाड़ियों की घोषणा की। जिन रेलगाड़ियों के फेरों और दूरियों में वृद्धि की जाएंगी उसमें से अधिकतर पश्चिम बंगाल को छूएंगी।

रेल पटरियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए सुखी गृह योजना के माध्यम से छोटे-छोटे आश्रय मुहैया कराने की एक योजना शुरू की गई। इसके तहत पायलट आधार पर मुम्बई, सियालदह, सिलीगुड़ी, तिरूचिरापल्ली सहित अन्य स्थानों पर लोगों को 10,000 आवासीय इकाइयां मुहैया कराई जाएंगी।

क्या कहा ममता ने :-

लोकसभा में बजट भाषण में बनर्जी ने कहा, "हमने दो आयामी दृष्किोण अपनाया है। पहला टिकाऊ, प्रभावी और तेजी से रेलवे का विकास और दूसरा आम आदमी को ध्यान में रखते हुए सामाजिक जिम्मेदारी को निभाना।"

रेल मंत्री के रूप में अपना पांचवा बजट पेश करते हुए ममता ने कहा, "इस बजट में हमने मानवीय चेहरे के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर पर्याप्त ध्यान देते हुए मजबूत आर्थिक स्थिति पर जोर दिया है।" पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे अपने राज्य पर गर्व है। देश के दूसरे राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के लिए भी मुझसे जो कुछ बन पड़ेगा, मैं करूंगी।"

प्रधानमंत्री ने की तारीफ :-

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बनर्जी इसे आदमी का रेल बजट करार देते हुए उनकी खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यात्री और माल भाड़े में वृद्धि नहीं होने से महंगाई पर काबू पाने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा, "रेल मंत्री ने सराहनीय कार्य किया है।"

केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की मंत्री रहते हुए उन्होंने पूर्व के दो रेल बजटों में किराये में बिना को वृद्धि किए वर्ष 2009-10 में 122 नई रेलगाड़ियों और 2010-11 में 54 नई रेलगाड़ियों की घोषणा की थी।

फिर भी पटरी से नहीं उतरी ममता एक्सप्रेस :-

रेल बजट पेश करने के दौरान कई मौके ऐसे आए कि लगा लगभग डेढ़ घंटे के अपने सफर के दौरान 'ममता एक्सप्रेस' पटरी से उतर जाएगी लेकिन विपक्ष की लाख कोशिशों के बावजूद ऐसा हुआ नहीं। आम तौर पर जल्दी ही गुस्सा करने वाली रेल मंत्री ममता बनर्जी को कई मौकों पर गुस्सा भी आया लेकिन उन्होंने अपना संयम नहीं खोया और धर्य के साथ हंसते-हंसाते हुए उन्होंने रेल बजट की इतिश्री की।

डेढ़ घंटे के रेल बजट भाषण के दौरान ममता को कई दफे विपक्ष और यहां तक कि सत्ताधारी दलों के सदस्यों के आक्रोश का सामना करना पड़ा लेकिन 'दीदी' के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने अपना संयम बनाए रखा और उन्हें अपने ही अंदाज में खुश करने की कोशिश की।

बजट भाषण के दौरान जितनी बार बंगाल, अमेठी और रायबरेली का जिक्र आया, विपक्षी सदस्यों ने व्यंग्य भरे ठहाके लगाए। हालांकि जब इस दौरान अधिकांश योजनाओं व रेलगाड़ियों को बंगाल भेजने का जिक्र आया तो बिहार के सदस्य इतने आग बबूला हो गए कि एक बार लगा कि कहीं रेल बजट हंगामे की भेंट न चढ़ जाए।

दरअसल, रेल बजट में बिहार को नजरअंदाज किए जाने से जनता दल (युनाइटेड) व बिहार के भाजपा सदस्य इतने नाराज हो गए कि वे आसन के समीप आ गए और ममता के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सदन का माहौल बंगाल विरूद्ध बिहार में तब्दील हो गया। बिहार के सदस्य अपनी मांगों को लेकर हंगामा कर रहे थे और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य ममता का बचाव करते रहे। जद (यु) अध्यक्ष शरद यादव और संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल के बीचबचाव के बाद ये सदस्य शांत हुए।

बंगाल पर ममता की मेहरबानी पर बिहार के सदस्यों का गुस्सा देख ममता को पूर्व रेल मंत्री लालू यादव की सहायता लेनी पड़ी। ममता ने लालू से कहा, "आपने भी तो बिहार के लिए बहुत कुछ किया लेकिन अब क्यों शोर मचा रहे हैं। इन्हें शांत कीजिए।" इसके बाद लालू ने सदस्यों को शांत करने की कोशिश करते हुए कुछ कहा लेकिन शोरगुल में उनकी बात दब गई।

जद (यु) के मोनाजिर हसन तो इतने आग बबूला हो गए कि वह ममता की ओर हाथ दिखाते हुए गुस्से से आगे बढ़े और अध्यक्ष के आसन की ओर बढ़ने लगे। उनका गुस्सा भांप शरद यादव ने फिर उन्हें रोक लिया और उन्हें उनकी सीट पर बिठाया।

भाषण के दौरान सदस्य बीच-बीच में अपने क्षेत्र की मांगों की ओर जब ममता का ध्यान आकृष्ट कर रहे थे तो ममता कभी गुस्सा जाती लेकिन बड़े ही प्यार से कहती, "आपके लिए भी आएगा रे भाई। सुनो न मेरी बात ध्यान से।" एक दफा तो गुस्साई ममता यह कहती हुई अपनी सीट पर बैठ गईं कि "मैं सभी को संतुष्ट नहीं कर सकती।"

रेल बजट के दौरान जब केरल का जिक्र आया तो उन्होंने कहा, "ये केरल के लिए है क्योंकि हम सभी करेल से बहुत प्यार करते हैं। आप भी इसे महसूस कीजिए।" केरल के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका अभिवादन किया।

विपक्षी सदस्यों की टोकाटोकी से गुस्साई ममता ने तो एक बार यह भी कहा, "यह गरीब का बजट है। पूरा देश देख रहा है। आपका व्यक्तिगत मामला है तो मुझे बाद में बताइएगा, मैं उस पर गौर करूंगी। आपका हक नहीं है कि देश के कोने-कोने में रेल बजट देख रहे लोगों को आप इससे वंचित करें।"

बंद व हड़ताल के दौरान रेल को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए ममता ने जब इन घटनाओं की निंदा की तो विपक्ष के एक सदस्य ने कहा, "आपने भी तो बहुत रेल रोका है।" इस पर ममता ने तपाक से जवाब दिया, "रेल रोको मैंने जिंदगी में कभी नहीं किया।"

विपक्ष ने कहा, बंगाल का बजट :-

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रेल बजट की आलोचना करते हुए इसे छलने वाला करार दिया। पार्टी ने कहा कि इस रेल बजट में गठबंधन की मजबूरियां साफ झलक रही हैं।

वरिष्ठ माकपा नेता सीताराम येचुरी ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह लोगों को छलने वाला बजट है जिसमें बहुत ही चालाकी से हाथ की सफाई की गई है। यह रेल बजट गठबंधन की मजबूरियों की भेंट चढ़ गया। मैं अचम्भित हूं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कैसे इस रेल बजट को प्रस्तुत करने की अनुमति दी।"

उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव को लक्ष्य में रखकर यह रेल बजट तैयार किया गया है, जहां तृणमूल कांग्रेस विपक्ष में है। इसके बावजूद बजट में अगले साल के लिए कुछ भी नहीं है।"

लोकसभा में माकपा के नेता बासुदेव आचार्य ने भी रेल बजट की आलोचना की। उन्होंने कहा, "विजन 20-20 की जो योजना है वह हवाहवाई है क्योंकि 2011-12 की योजनाओं, मसलन 1300 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने इत्यादि के लिए पर्याप्त कोष की कोई घोषणा नहीं की गई है। यहां तक कि 1000 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने की पिछले साल की योजना को घटाकर 700 किलोमीटर कर दिया गया है।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रेल बजट को पश्चिम बंगाल का चुनावी बजट करार दिया। साथ ही पार्टी ने बजट प्रस्तावों के क्रियान्वयन के सम्बंध में एक लेखाजोखा बजट भी पेश किए जाने की मांग की है।

पार्टी ने कहा, "रेलवे की वित्तीय व्यवस्था और इसके प्रदर्शन को लेकर बहुत गड़बड़झाला है। रेलवे की पटरियों की मजबूती और सुरक्षा उपकरणों को बेहतर करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जब सरकार थी तब रेलवे को मुनाफे का सौदा था। वर्ष 2007-08 में भारतीय रेलवे का नकद अधिशेष 25,000 करोड़ था जो कि अब 1328 करोड़ रह गया है। रेलवे अब किराए पर चल रही है। उसका मुनाफे का दौर अब खत्म हो गया है।"

भाजपा का कहना है, "पिछले दो बजटों में ममता ने होटलों, अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, मॉल, खेल स्टेडियमों और यहां तक कि पश्चिम बंगाल में एक अखबार निकालने की बात की थी। उन्होंने कई रेलगाड़ियां शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन इनमें से अधिकांश परियोजनाएं शुरू ही नहीं हुई।"

पार्टी ने कहा, "हम मांग करते हैं कि सरकार को एक लेखजोखा बजट भी पेश करना चाहिए ताकि देश की जनता जान सके कि उसके द्वारा किए गए वादों का आखिरकार क्या प्रदर्शन रहा।"

भाजपा नेताओं ने इसे पश्चिम बंगाल का रेल बजट करार दिया और कहा कि इसके जरिए ममता ने राइटर्स बिल्डिंग के लिए वहां तक छुपी रेल लाइन बिछाने की कोशिश की है। भाजपा के एक नेता ने तो यहां तक कहा, "रेल बजट यानी बंगाल ही बंगाल, बाकी देश कंगाल।"

लोकसभा में भाजपा के उपनेता गोपीनाथ मुंडे ने रेल बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल में चुनाव हैं, इसलिए रेल बजट में सिर्फ वादे ही वादे हैं। घोषणाएं ज्यादा और अमल कम है। इस बजट में सारा देश कंगाल है, सिर्फ बंगाल ही बंगाल है।"

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "इस बजट से राहत तो दूर मायूसी ही मायूसी हाथ आई है। बंगाल में राईटर्स बिल्डिंग के लिए छुपी हुई रेल लाइन बिछाने की कोशिश की गई है।"

उन्होंने कहा, "बिहार आज भी उपेक्षित है। बजट से बिहार को निराशा हुई है। सांसदों ने जो गुस्सा दिखाया वह वाजिब था।"

आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की महासचिव जे. जयललिता ने कहा कि रेल मंत्री ममता बनर्जी ने राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय संसाधनों को बंधन बना लिया है।

रेल मंत्री द्वारा पेश रेल बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जयललिता ने यहां जारी एक बयान में कहा, "पूरे बजट को देखकर यही कहा जा सकता है कि मंत्री द्वारा अपने राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय संसाधन को बंधक बना लिया है।"

उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने अपने गृह राज्य को ध्यान में रखकर यह बजट प्रस्तुत किया है। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं नंदीग्राम और सिंगूर के लिए घोषित की है, जहां कुछ साल पहले उन्होंने सफल राजनीतिक लड़ाई लड़ी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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