रेल बजट(प्रतिक्रियाएं): कुछ ने तारीफ की तो कुछ ने कहा लोक लुभावन (लीड-1)
यात्रियों और उद्योगों को किराए और मालभाड़े में वृद्धि से बचाते हुए बनर्जी ने वर्ष 2011-12 के रेल बजट में 57,630 करोड़ रुपये (12.7 अरब डॉलर) के निवेश, 68 नई रेलगाडियों के संचालन की घोषणाएं की हैं और विजन 2020 के मुताबिक रेल आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रबंध निदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "57,630 करोड़ रुपये के योजना व्यय के प्रावधान से उद्योगों को रेलवे के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। सीआईआई का मानना है कि रेलवे को आगे ले जाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी सबसे प्रभावी तरीका है।"
सुरक्षा और सार्वजनिक निजी भागीदारी से कई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, नई कोच फैक्ट्रियों पर खर्च बढ़ाकर और महिलाओं और पत्रकारों को छूट बढ़ाकर बनर्जी ने सभी वर्गो पर ध्यान दिया है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (फिक्की) ने कहा, "यह बेहद सुखद है कि सार्वजनिक निजी भागीदारी वाले 85 प्रस्ताव स्वीकार किए गए हैं और सरकार इनके लिए एकल खिड़की प्रणाली शुरू कर रही है।"
इस साल रेलवे की आय पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है। रेलवे द्वारा माल ढुलाई में 99.3 करोड़ टन और यात्रियों की संख्या में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वहीं बनर्जी के इस बजट को लोक लुभावन बताते हुए कुछ जानकारों ने कहा है कि यह स्पष्ट नहीं है कि बजट में घोषित की गई योजनाओं के लिए पैसा कहां से जुटाया जाएगा।
भारत में डेलायट के वरिष्ठ निदेशक विश्वास उदगिरकर ने कहा, "यह बजट राजनीतिक विचारों पर आधारित है। उन्होंने कई स्वागतयोग्य घोषणाएं की हैं लेकिन यह देखना रोचक होगा कि वह इन योजनाओं को लागू करने के लिए पैसे कैसे जुटाती हैं। रेलवे का संचालन अनुपात 92 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।"
एसोसिएट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया (एसोचैम) के अध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा, "रेल बजट में उद्योगों के लिए अवसर बहुत कम दिए गए हैं और ज्यादातर ध्यान जनता और कर्मचारियों के कल्याण पर रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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