महंगाई, तेल की कीमत चिंता का प्रमुख कारण : प्रणब
मुखर्जी ने लोक सभा में वित्त वर्ष 2011-12 की आर्थिक समीक्षा पेश करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि महंगाई का दबाव बना हुआ है। तेल की कीमत बढ़ती जा रही है। स्वाभाविक रूप से इसका समग्र अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
खाद्य महंगाई दर 12 फरवरी को समाप्त सप्ताह में बढ़कर11.49 फीसदी स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले के सप्ताह में यह गिरावट के साथ 11.05 फीसदी पर थी। मौजूदा वित्त वर्ष की अधिकतर अवधि में महंगाई की दर दोहरे अंकों में बनी रहीं।
उधर समग्र महंगाई दर जनवरी में 8.23 फीसदी पर है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत में हो रही हालिया वृद्धि ने देश के नीति निर्माताओं को चिंता में डाल दिया है। अरब देशों में जारी अस्थिरता से तेल की आपूर्ति में कमी होने की आशंका के बीच तेल की कीमत शुक्रवार को प्रति बैरल (159 लीटर) 112 डॉलर पर पहुंच गई।
मुखर्जी ने कहा कि चालू खाता का घाटा चिंता का एक दूसरा विषय है। असंतुलन हालांकि कम हुआ है, लेकिन यह अभी भी काफी है।
विकास दर के बारे में मुखर्जी ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर के 8.6 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2011-12 में विकास दर नौ फीसदी रहने की सम्भावना है।
उन्होंने महंगाई के नकारात्मक असर से बचाव के लिए कृषि और सामाजिक संरचना क्षेत्र में निवेश की जरूरत बताई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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