रेल बजट : फिर भी पटरी से नहीं उतरी 'ममता एक्सप्रेस'
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। रेल बजट पेश करने के दौरान कई मौके ऐसे आए कि लगा लगभग डेढ़ घंटे के अपने सफर के दौरान 'ममता एक्सप्रेस' पटरी से उतर जाएगी लेकिन विपक्ष की लाख कोशिशों के बावजूद ऐसा हुआ नहीं। आम तौर पर जल्दी ही गुस्सा करने वाली रेल मंत्री ममता बनर्जी को कई मौकों पर गुस्सा भी आया लेकिन उन्होंने अपना संयम नहीं खोया और धर्य के साथ हंसते-हंसाते हुए उन्होंने रेल बजट की इतिश्री की।
डेढ़ घंटे के रेल बजट भाषण के दौरान ममता को कई दफे विपक्ष और यहां तक कि सत्ताधारी दलों के सदस्यों के आक्रोश का सामना करना पड़ा लेकिन 'दीदी' के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने अपना संयम बनाए रखा और उन्हें अपने ही अंदाज में खुश करने की कोशिश की।
बजट भाषण के दौरान जितनी बार बंगाल, अमेठी और रायबरेली का जिक्र आया, विपक्षी सदस्यों ने व्यंग्य भरे ठहाके लगाए। हालांकि जब इस दौरान अधिकांश योजनाओं व रेलगाड़ियों को बंगाल भेजने का जिक्र आया तो बिहार के सदस्य इतने आग बबूला हो गए कि एक बार लगा कि कहीं रेल बजट हंगामे की भेंट न चढ़ जाए।
दरअसल, रेल बजट में बिहार को नजरअंदाज किए जाने से जनता दल (युनाइटेड) व बिहार के भाजपा सदस्य इतने नाराज हो गए कि वे आसन के समीप आ गए और ममता के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सदन का माहौल बंगाल विरूद्ध बिहार में तब्दील हो गया। बिहार के सदस्य अपनी मांगों को लेकर हंगामा कर रहे थे और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य ममता का बचाव करते रहे। जद (यु) अध्यक्ष शरद यादव और संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल के बीचबचाव के बाद ये सदस्य शांत हुए।
बंगाल पर ममता की मेहरबानी पर बिहार के सदस्यों का गुस्सा देख ममता को पूर्व रेल मंत्री लालू यादव की सहायता लेनी पड़ी। ममता ने लालू से कहा, "आपने भी तो बिहार के लिए बहुत कुछ किया लेकिन अब क्यों शोर मचा रहे हैं। इन्हें शांत कीजिए।" इसके बाद लालू ने सदस्यों को शांत करने की कोशिश करते हुए कुछ कहा लेकिन शोरगुल में उनकी बात दब गई।
जद (यु) के मोनाजिर हसन तो इतने आग बबूला हो गए कि वह ममता की ओर हाथ दिखाते हुए गुस्से से आगे बढ़े और अध्यक्ष के आसन की ओर बढ़ने लगे। उनका गुस्सा भांप शरद यादव ने फिर उन्हें रोक लिया और उन्हें उनकी सीट पर बिठाया।
भाषण के दौरान सदस्य बीच-बीच में अपने क्षेत्र की मांगों की ओर जब ममता का ध्यान आकृष्ट कर रहे थे तो ममता कभी गुस्सा जाती लेकिन बड़े ही प्यार से कहती, "आपके लिए भी आएगा रे भाई। सुनो न मेरी बात ध्यान से।" एक दफा तो गुस्साई ममता यह कहती हुई अपनी सीट पर बैठ गईं कि "मैं सभी को संतुष्ट नहीं कर सकती।"
रेल बजट के दौरान जब केरल का जिक्र आया तो उन्होंने कहा, "ये केरल के लिए है क्योंकि हम सभी करेल से बहुत प्यार करते हैं। आप भी इसे महसूस कीजिए।" केरल के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका अभिवादन किया।
विपक्षी सदस्यों की टोकाटोकी से गुस्साई ममता ने तो एक बार यह भी कहा, "यह गरीब का बजट है। पूरा देश देख रहा है। आपका व्यक्तिगत मामला है तो मुझे बाद में बताइएगा, मैं उस पर गौर करूंगी। आपका हक नहीं है कि देश के कोने-कोने में रेल बजट देख रहे लोगों को आप इससे वंचित करें।"
बंद व हड़ताल के दौरान रेल को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए ममता ने जब इन घटनाओं की निंदा की तो विपक्ष के एक सदस्य ने कहा, "आपने भी तो बहुत रेल रोका है।" इस पर ममता ने तपाक से जवाब दिया, "रेल रोको मैंने जिंदगी में कभी नहीं किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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