लीबिया में हालात गंभीर, सैकड़ों के मारे जाने की आशंका (राउंडअप)

आतंकवादी संगठन अल कायदा ने जहां लीबिया में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया है। वहीं मुअम्मार गद्दाफी ने देश में जारी हिंसा के लिए अल कायदा को जिम्मेदार ठहराया है।

अमेरिका लीबिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। जबकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने लीबिया में शीघ्र और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिए संगठित अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।

सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर यमन और बहरीन में भी प्रदर्शन जारी हैं। इन देशों में बढ़ते तनाव के चलेत बुधवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई।

बहरीन में विपक्षी पार्टियों ने अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित किया है जबकि सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज हुए हैं। जबकि यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह ने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव को रोकने की अपील करते हुए प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करने का आदेश दिया है।

अल कायदा की उत्तरी अफ्रीकी इकाई ने गुरुवार को कहा कि वह "लीबिया में जनांदोलन की मदद के लिए उससे जो भी संभव होगा, करेगा।"

समाचार चैनल सीएएन ने अमेरिका के आतंकवाद निगरानी संगठन एसआईटीई' के हवाले से खबर दी है कि जिहादियों की वेबसाइट 'अल कायदा इन इस्लामिक मगरिब' पर गुरुवार को जारी एक बयान में प्रदर्शनकारियों पर हमले के लिए सैनिकों और विमानों के इस्तेमाल के लीबियाई नेता मुअम्मार गद्दाफी के फैसले की निंदा की गई।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 में अमेरिकी सुरक्षा बलों को इराक में अल कायदा के दस्तावेज मिले थे, जिसके मुताबिक अल कायदा में लोगों के शामिल होने की वजह से लीबिया ने कई अरब देशों पर दबाव डाला था।

समाचार चैनल अल अरेबिया को एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि शहर एक 'कत्लगाह' बन गया है और यह बता पाना मुश्किल है कि कितने लोग मारे गए हैं और कितने लोग घायल हुए हैं।

समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' ने एक टेलीविजन रिपोर्ट के हवाले से बताया कि गद्दाफी की सेनाओं ने राजधानी से 120 किलोमीटर दूर जौरा के एक कस्बे पर हमला किया।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने फोन पर बताया, "जौरा में नरसंहार हो रहा है। सैकड़ों की संख्या में लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं।"

लीबिया में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का दमन रोकने के लिए अमेरिका लीबिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पी. जे. क्राउले ने कहा, "हम लीबिया के खिलाफ कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कदम उठा सकते हैं। प्रतिबंध लगाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।"

अमेरिका और अन्य देशों ने पिछले दिनों लीबिया के तानाशाह मुअम्मार गद्दाफी द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के दमन की निंदा की है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बुधवार को लीबिया में शीघ्र और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिए संगठित अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक मून उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में चल रहे घटनाक्रम के कारण लास एंजेलिस का दौरा समाप्त करके बुधवार सुबह न्यूयार्क लौट आए।

मून ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने अरब लीग के महासचिव अरम मूसा और संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मामलों के अवर महासचिव बी. लेन पास्को के साथ मौजूदा स्थितियों पर विचार-विमर्श किया है।

मून ने कहा, "हम बहरीन, यमन और अन्य देशों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हमने लीबिया में हाल ही में हुए घटनाक्रम को देखा है जो कि बेहद चिंताजनक है। मौजूदा स्थिति में पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता और हालात किसी भी दिशा में जा सकते हैं यह बेहद खतरनाक है।"

गौरतलब है कि लीबिया में गद्दाफी के 41 वर्षो के शासन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अनुसार गद्दाफी शासन के खिलाफ 14 फरवरी से शुरू प्रदर्शनों के दौरान सरकारी बलों के साथ झड़पों में अब तक 500 लोग मारे जा चुके हैं और 4,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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