गद्दाफी ने कहा, वह त्रिपोली में ही हैं (लीड-1)

काहिरा/त्रिपोली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। लीबियाई नेता मुअम्मार गद्दाफी ने देश से भागने सम्बंधी अफवाहों को खारिज करते हुए मंगलवार को संक्षिप्त अवधि के लिए सरकारी टेलीविजन पर अपनी उपस्थित दर्ज कराई और कहा कि वह त्रिपोली में ही हैं, न कि वेनेजुएला में।

गद्दाफी (68) ने एक युवा सैन्य अधिकारी के रूप में बिना किसी रक्तपात के एक विद्रोह के जरिए सत्ता पर कब्जा जमाया था। वह पिछले 41 वर्षो से सत्ता पर काबिज हैं। पिछले सप्ताह भड़की अशांति के बाद से वह पहली बार टीवी पर नजर आए हैं। वह भी तब जब पिछली रात को सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं।

गद्दाफी ने सरकारी टीवी पर कहा, "मैं त्रिपोली में ही हूं न कि वेनेजुएला में। आवार कुत्तों के चैनलों पर भरोसा मत कीजिए।" टीवी पर यह बताया गया था कि गद्दाफी मंगलवार को अपने घर के बाहर बोल रहे थे।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने सोमवार को कहा था कि गद्दाफी वेनेजुएला चले गए हैं, हालांकि कराकस ने इससे इंकार किया था।

लीबिया में जारी अशांति हिंसक रूप धारण कर चुकी है और अमेरिकी संगठन, ह्यूमन राईट्स वाच के अनुसार यहां अशांति की आग में आहुति देने वालों की संख्या कम से कम 233 हो गई है। अपुष्ट खबरों में मरने वालों की संख्या और अधिक बताई जा रही है।

अलजजीरा के अनुसार टीवी पर अपनी 22 सेकंड की उपस्थित के दौरान गद्दाफी एक वैन से बाहर आए और एक छाता खोलकर सिर पर लगाया।

गद्दाफी ने कहा, "मैं त्रिपोली के ग्रीन स्क्वे यर पर जमें युवकों से कुछ कहना चाहता था और उनके साथ देर तक रहना चाहता था, लेकिन बारिश शुरू हो गई। अल्लाह का शुक्रिया, यह एक अच्छी बात है।"

लीबिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन पड़ोसी ट्यूनिशिया व मिस्र में हुई सफल कं्रातियों से प्रेरित है।

ट्यूनिशिया में एक महीने की अशांति के बाद जिने अल-अबीदीन बेन अली के शासन का 14 जनवरी को अंत हो गया था। उसके बाद 25 जनवरी को मिस्र में विरोध प्रदर्शन भड़क उठा। परिणामस्वरूप हुस्नी मुबारक ने 11 फरवरी को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तो इस पूरे क्षेत्र में अशांति की लहर चल पड़ी है। बहरीन, ईरान, यमन, अल्जीरिया और जोर्डन अशांति की चपेट में हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने अलजजीरा को बताया कि लीबिया में अशांति ने उस समय अचानक हिंसक मोड़ ले लिया, जब सोमवार अपराह्न् एक विशाल सरकार विरोधी जुलूस पर सुरक्षा बलों ने लड़ाकू विमानों से हमला कर दिया।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "आज हम जिस स्थिति का सामना कर रहे हैं, वह अकाल्पनिक है। लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर एक के बाद दूसरे इलाके में अंधाधुंध बम बरसा रहे हैं। इसमें कई लोग मारे गए हैं।"

प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "जो भी बाहर निकलता है, चाहे वह अपनी कार में ही क्यों न हो, उसे वे निशाना बनाते हैं।"

इसके पहले गद्दाफी के बेटे सैफ-अल-इस्लाम (38) ने चेतावनी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारी सरकार द्वारा प्रस्तावित सुधार पर राजी नहीं हुए तो देश को रक्तरंजित गृह युद्ध से गुजरना होगा।

बीबीसी के एक संवाददाता के मुताबिक गद्दाफी सरकार को कई मोर्चो पर एक साथ लड़ना पड़ रहा है, क्योंकि सैन्य इकाइयां गद्दाफी के खिलाफ उठ खड़ी हुई हैं।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार सेना के दो विमान उत्तर पूर्वी शहर बेनगाजी में उतरे, जिनके पायलटों ने शहर पर बम गिराने से इंकार कर दिया था। इसके तत्काल बाद मेडिटेरेनियन में स्थित द्वीपीय राज्य माल्टा से खबरें आईं कि लगभग दो लीबियाई लड़ाकू विमानों के पायलटों ने वहां राजनीतिक शरण मांगी है।

अल अरबिया के ऑनलाइन संस्करण ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा है कि सोमवार को लोकतंत्र समर्थकों और गद्दाफी के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में 150 से अधिक लोग मारे गए हैं।

मिस्र मूल के एक मौलाना, इमाम यूसुफ अल-करदावी ने भी गद्दाफी की हत्या के लिए फतवा जारी किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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