गद्दाफ़ी के पुत्र की गृह युद्ध की चेतावनी

गद्दाफ़ी के पुत्र की गृह युद्ध की चेतावनी

लीबिया के पूर्वी और दक्षिणी भाग से प्रदर्शन राजधानी त्रिपोली तक फैल गए हैं

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी की सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन बेनग़ाज़ी से राजधानी त्रिपोली तक फैल गए हैं. सड़कों पर गोलीबारी की आवाज़े सुनी जा सकती हैं और थानों समेत कई इमारतों को आग लगा दी गई है.

इस बीच कर्नल गद्दाफ़ी के एक पुत्र सैफ़ अल इस्लाम ने लीबिया के सरकारी टीवी पर देश को संबोधित करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ये परिस्थितयाँ जारी रहीं तो देश में गृह युद्ध, विभाजन और हिंसक संघर्ष होगा जो लीबिया ग़रीबी और भुखमरी की ओर धकेल देगा.

ग़ौरतलब है कि पहले ट्यूनिशिया और 11 फ़रवरी को मिस्र में लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शनों से हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अरब जगत में कई जगह प्रदर्शन शुरु हो गए हैं.

अरब जगत में बहरीन, यमन, मोरोक्को और अलजीरिया में प्रदर्शन हो रहे हैं. यही नहीं, ईरान में भी राजधानी तेहरान समेत कुछ शहरों में लोगों ने प्रदर्शन करने की कोशिश की है. पूर्व राष्ट्रपति अक़बर हाशमी रफ़सनजानी की बेटी और सांसद फ़ाज़ेह हाशमी को गिरफ़्तार किया गया और फिर रिहा कर दिया गया.

चाहे देश में 41 साल से सत्ता में बने हुए लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी के बारे में कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है लेकिन उनके पुत्र ने दावा किया कि वे देश में ही मौजूद हैं.

उधर अरब लीग में लीबिया के दूत अब्देल मोनिम अल होनी ने घोषणा की है कि 'प्रदर्शनकारियों के दमन और उनके ख़िलाफ़ हुई हिंसा' का विरोध करने के लिए वे 'क्रांति का हिस्सा' बनने जा रहे हैं.

अमरीका ने लीबिया में हिंसा की निंदा की है और सरकार के अनुरोध किया है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की इजाज़त दे. बीबीसी संवाददाता टोन बर्रिज के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे लीबिया की स्थिति पर गंभीर चिंता है.

अमरीकी अधिकारियों ने लीबिया के विदेश मंत्री से बात की है और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा पर आपत्ति जताई है.

सैफ़ अल इस्लाम गद्दाफ़ी ने अपने संबोधन में कहा, "बेनग़ाज़ी पर विपक्ष का कब्ज़ा हो गया है और चरमपंथियों ने घोषणा की है कि देश का तीसरा बड़ा शहर अल बायदा इस्लामी अमीरात बन गया है. बैदा में केवल 14 लोग मारे गए थे और बेनग़ाज़ी में 80 लोग मरे थे. यदि ये स्थिति बनी रहती है तो देश में गृह युद्ध, विभाजन, मौतें और हिंसक संघर्ष होगा. इससे तेल और गैस के भंडार नष्ट हो जाएँगे और देश ग़रीबी और भुखमरी का शिकार हो जाएगा."

सैफ़ गद्दाफ़ी ने चेताया कि सेना अच्छी हालत में है और कबायली नेता गद्दाफ़ी के समर्थन में पहुँच रहे हैं

उनका कहना था, "लीबिया ट्यूनिशिया या मिस्र नहीं है. विदेशों में रह रहे विपक्षी तत्व मिस्र जैसी फ़ेसबुक क्रांति लाने के प्रयास कर रहे हैं. सुरक्षाकर्मियों ने उनकी साज़िश नाकाम कर दी है. सैनिकों ने गोलियाँ इसलिए चलाईं क्योंकि वे नागरिकों के प्रदर्शनों का सामना करने में प्रशिक्षित नहीं हैं."

सैफ़ अल इस्लाम ने कहा, "लीबिया की सेना बहुत अच्छी हालत में है और हज़ारों कबायली नेता गद्दाफ़ी और राजधानी की हिफ़ाज़त के लिए त्रिपोली पहुँच रहे हैं. लीबिया और उसकी क़ौम का भविष्य दांव पर है और मैं और मेरा परिवार अंत तक लड़ेगे."

सैफ़ गद्दाफ़ी के संबोधन से कुछ ही देर पहले तक त्रिपोली में प्रदर्शनकारियों के नारे गूँज रहे थे. सूत्रों के मुताबिक कम से कम एक पुलिस थाने और सत्ताधारी पार्टी की एक इमारत को आग लगा दी गई थी.

त्रिपोली के गौर्गा इलाक़े में सुरक्षाकर्मियों ने आँसू गैस छोड़ी और गोलियाँ चलाई.

पूर्वी लीबिया में स्थित बेनग़ाज़ी शहर पर प्रदर्शनकारियों का कब्ज़ा हो गया है. वहाँ पिछले कई दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे और सेना ने मशीन-गनों से प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की थी.

बेनग़ाज़ी के अस्पतालों में अब भी हताहतों को लाया जा रहा है. एक डॉक्टर ने कहा कि रविवार दोपहर तक वहाँ 50 शव लाए गए थे.

राजधानी त्रिपोली से 40 किलोमीटर पश्चिम में स्थित शहर अज़ ज़ाविया से एक नागरिक ने बीबीसी को बताया कि प्रदर्शनकारियों ने गद्दाफ़ी प्रशासन से जुड़ी कई इमारतों को आग लगा दी जिनमें लीबियाई नेताओं के गेस्ट हाउस शामिल हैं.

प्रदर्शन तोब्रुक और अल बायदा में भी हो रहे हैं.

लीबिया से पुष्ट जानकारी पाना मुश्किल हो गया है क्योंकि वहाँ विदेशी पत्रकारों को त्रिपोली के बाहर जाने की इजाज़त नहीं है. साथ ही, सरकार ने इंटरनेट और अन्य मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिए हैं.

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