लीबिया में मरने वालों की संख्या 100 हुई

बेनगाजी में निवास कर रहे मिस्र वासी लीबिया में 41 वर्षो से शासन कर रहे मुअम्मार गद्दाफी से इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।

60 लाख आबादी वाले लीबिया के पास अफ्रीका में एक सबसे बड़ा तेल भंडार है।

लीबियाई प्रदर्शनकारी मिस्र एवं ट्यूनिशिया में हुई सफल क्रांतियों से उत्साहित हैं। ट्यूनिशिया के नेता जिने अल-अबीदीन बेन अली को जनवरी में कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, जबकि मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने 11 फरवरी को इस्तीफा दे दिया।

बेनगाजी में शनिवार को उस समय हिंसा भड़क उठी, जब सुरक्षा बलों ने अंतिम संस्कार के लिए जुटी एक भीड़ पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में कम से कम 15 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि मारे गए लोग, पिछले सप्ताह सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के प्रति शोक मनाने आए थे। इसके साथ ही लीबिया में छह दिनों से जारी अशांति में मरने वालों संख्या 100 के पार पहुंच गई है।

कुछ मीडिया रपटों में मरने वालों की संख्या 200 बताई गई है।

लीबिया में जारी अशांति के बीच भारत ने रविवार को कहा कि उस देश में सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं।

विदेश सचिव निरूपमा राव ने ट्विटर पर रविवार सुबह लिखा है, "लीबिया में भारतीय सुरक्षित हैं। दूतावास भारतीयों और भारतीय कम्पनियों से बराबर सम्पर्क में है।" विदेश मंत्रालय के मुताबिक लीबिया में लगभग 18,000 भारतीय हैं।

बेनगाजी निवासी एक लिबियाई व्यापारी, अहमद ने अल जजीरा को बताया कि अस्पतालों में रक्त समाप्त हो गए हैं, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में घायल प्रदर्शनकारी पहुंच रहे हैं।

अल जजीरा ने अहमद के हवाले से कहा है, "यह एक बड़ा नरसंहार है। इसके पहले इस तरह की घटना हमने कभी नहीं सुनी थी। यह भयानक है।"

प्रदर्शन को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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